संभल की शाही जामा मस्जिद पर ASI की कार्रवाई, हाई कोर्ट के आदेश के बाद शुरू हुई पुताई—जानिए पूरा मामला
उत्तर प्रदेश के संभल में स्थित शाही जामा मस्जिद एक बार फिर सुर्खियों में है। इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश के बाद रविवार को मस्जिद की बाहरी दीवारों की पुताई का काम शुरू कर दिया गया है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की टीम ने शनिवार को मस्जिद का निरीक्षण किया था, जिसके बाद रंगाई-पुताई का कार्य रविवार से प्रारंभ कर दिया गया।
कोर्ट के आदेश पर ASI की कार्रवाई
12 मार्च को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने ASI को एक सप्ताह के भीतर मस्जिद की बाहरी दीवारों की पुताई करने का निर्देश दिया था। इसके बाद 13 मार्च को ASI की एक टीम ने मस्जिद का निरीक्षण किया और आवश्यक तैयारियों का आकलन किया। मस्जिद कमेटी के अध्यक्ष जफर अली के अनुसार, होली के बाद 16 मार्च से पेंटिंग का काम शुरू हो गया है।
अगली सुनवाई में हो सकता है बड़ा फैसला
संभल की इस ऐतिहासिक मस्जिद का मामला पिछले साल नवंबर में तब तूल पकड़ गया था, जब मस्जिद के सर्वे के बाद दंगे भड़क उठे थे, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई थी और कई लोग घायल हुए थे। अब, मामले की अगली सुनवाई 8 अप्रैल को होनी है, जहां कुछ अहम फैसले लिए जा सकते हैं।
क्या कहता है हिंदू और मुस्लिम पक्ष?
मस्जिद कमेटी का पक्ष
मस्जिद कमेटी के अध्यक्ष जफर अली का कहना है कि पेंटिंग का खर्च मस्जिद कमेटी वहन कर रही है, हालांकि कुछ भाग ASI भी वहन कर सकता है। मस्जिद पर सफेद, हरा और सुनहरा रंग ही इस्तेमाल किया जाएगा, जैसा कि पहले भी होता आया है। उन्होंने हिंदू पक्ष द्वारा भगवा रंग के इस्तेमाल के दावे को ‘बकवास’ बताया और कहा कि शहर में अमन और शांति बनी रहनी चाहिए।
हिंदू पक्ष की प्रतिक्रिया
हिंदू पक्ष के वकील हरि शंकर जैन ने साफ किया कि पुताई केवल बाहरी दीवार पर की जा रही है और कोर्ट ने ASI को मस्जिद के बाहरी हिस्से पर लाइट लगाने का भी निर्देश दिया है।
क्या ASI ने किया विरोध?
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने ASI के वकील से यह स्पष्ट करने को कहा था कि मस्जिद की बाहरी दीवारों पर पुताई से क्या पूर्वाग्रह हो सकता है। मस्जिद समिति के वकील एस.एफ.ए. नकवी ने बताया कि ASI ने अब तक यह नहीं कहा कि वह पुताई और लाइट लगाने का विरोध कर रहा है।
रमजान के दौरान होगी लाइटिंग
मस्जिद कमेटी ने यह भी ऐलान किया कि रमजान के दौरान मस्जिद को रोशनी से सजाया जाएगा। हाई कोर्ट के आदेशानुसार, यह सजावट बिना किसी छेड़छाड़ के की जाएगी।
अब 8 अप्रैल की सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं, जहां यह तय हो सकता है कि आगे इस मस्जिद को लेक
र क्या नया मोड़ सामने आता है।
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