पाकिस्तान में जुमे की नमाज के दौरान बड़ा धमाका: क्या मस्जिदें अब आतंक का निशाना बन रही हैं?
जहां एक ओर भारत में होली और जुमे की नमाज शांतिपूर्वक संपन्न हुई, वहीं पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में एक बार फिर जुमे की नमाज के दौरान मस्जिद को निशाना बनाया गया। इस बार धमाका खैबर पख्तूनख्वा के दक्षिण वजीरिस्तान में हुआ, जिसमें कट्टरपंथी राजनीतिक पार्टी जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (जेयूआई) के जिला प्रमुख अब्दुल्ला नदीम समेत चार लोग घायल हो गए।
क्या पाकिस्तान में मस्जिदें अब सुरक्षित नहीं रहीं? यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में खैबर पख्तूनख्वा और अन्य इलाकों में मस्जिदों को निशाना बनाए जाने की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं।
कैसे हुआ विस्फोट?
डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, यह धमाका शुक्रवार (15 मार्च) को दोपहर 1:45 बजे हुआ, जब रमजान के महीने का दूसरा जुमे की नमाज अदा की जा रही थी।
विस्फोट आजम वारसाक बाईपास रोड पर मौलाना अब्दुल अजीज मस्जिद में हुआ।
यह इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) विस्फोट था, जिसे मस्जिद के मंच पर फिट किया गया था।
धमाके में जेयूआई के नेता अब्दुल्ला नदीम गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि तीन अन्य को मामूली चोटें आईं।
घायलों की पहचान रहमानुल्लाह, मुल्ला नूर और शाह बेहरान के रूप में हुई है।
सभी घायलों को जिला मुख्यालय अस्पताल में भर्ती कराया गया।
घटना के बाद पुलिस और सुरक्षा बलों ने इलाके को घेर लिया और जांच शुरू कर दी है।
क्या यह पहली बार हुआ है?
यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान में जुमे की नमाज के दौरान मस्जिदों को निशाना बनाया गया है।
फरवरी 2024: खैबर पख्तूनख्वा के नौशेरा जिले में दारुल उलूम हक्कानिया मदरसा में धमाका हुआ था। इसमें जेयूआई-एस नेता मौलाना हमीदुल हक हक्कानी सहित 6 लोग मारे गए और 15 घायल हुए।
जनवरी 2023: पेशावर के रेड जोन इलाके में स्थित मस्जिद में बड़ा विस्फोट हुआ, जिसमें 59 लोगों की मौत हो गई और 157 लोग घायल हुए। उस वक्त मस्जिद में 300 से 400 लोग मौजूद थे।
2022: पेशावर के जामिया मस्जिद कूचा रिसालदार में एक आत्मघाती हमलावर ने इमामबारगाह के दरवाजे पर तैनात पुलिसकर्मी की हत्या कर दी और फिर नमाजियों से भरी मस्जिद में घुसकर खुद को उड़ा लिया।
पाकिस्तान की मस्जिदें आतंकियों के निशाने पर क्यों?
विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान में कट्टरपंथी संगठनों की बढ़ती गतिविधियों और संप्रदायिक संघर्ष की वजह से मस्जिदें अब सुरक्षित नहीं रह गई हैं।
खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान जैसे इलाकों में आतंकी संगठनों का दबदबा बढ़ता जा रहा है।
इन हमलों के पीछे तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) और अन्य उग्रवादी गुटों का हाथ हो सकता है।
पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था कमजोर हो चुकी है, जिसके कारण सुरक्षा बलों और धार्मिक स्थलों पर हमले बढ़ गए हैं।
राजनीतिक दलों के अंदर भी धार्मिक गुटों की आपसी टकराहट बढ़ रही है, जो हिंसा को बढ़ावा दे रही है।
क्या पाकिस्तान सरकार स्थिति को संभाल पाएगी?
हर हमले के बाद पाकिस्तान की सरकार और सेना कड़ी कार्रवाई के दावे तो करती हैं, लेकिन हालात सुधरते नहीं दिख रहे।
नवाज शरीफ सरकार और सेना के बीच लगातार तनाव चल रहा है, जिससे आतंकी संगठनों को मजबूत होने का मौका मिल रहा है।
TTP, BLA और अन्य आतंकी संगठनों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही, जिससे मस्जिदें और धार्मिक स्थल लगातार निशाना बन रहे हैं।
पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियां हमलों को रोकने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रही हैं।
क्या अब मस्जिदों में नमाज अदा करना भी खतरनाक हो गया है?
जुमे की नमाज के दौरान मस्जिदों पर बार-बार होने वाले हमले इस सवाल को और गहरा कर रहे हैं।
क्या पाकिस्तान के लोग अब खुद को अपने ही देश में सुरक्षित महसूस नहीं कर सकते?
या फिर यह सिर्फ एक और घटना है, जिसे सरकार कु
छ दिनों बाद भूल जाएगी और आतंकी अपने अगले हमले की तैयारी करेंगे?
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