April 24, 2026

गेहूं की पैदावार ने तोड़ा रिकॉर्ड! किसानों को मिली बड़ी राहत, अब आटे की कीमतों में नहीं आएगा उबाल

देश के किसानों की मेहनत ने इस बार नया इतिहास रच दिया है। तमाम चुनौतियों और बदलते मौसम के बीच भारत में गेहूं की पैदावार ने रिकॉर्ड तोड़ दिया है, जिससे न सिर्फ किसानों के चेहरे खिले हैं, बल्कि आम जनता के लिए भी राहत भरी खबर सामने आई है—अब आटे की कीमतों में किसी तरह की तेजी की संभावना नहीं है।

रिकॉर्ड पैदावार का अनुमान
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को देश को यह बड़ी खबर दी कि वर्ष 2024-25 में गेहूं का उत्पादन रिकॉर्ड 11.53 करोड़ टन तक पहुंचने का अनुमान है, जो कि पिछले वर्ष के 11.33 करोड़ टन की तुलना में करीब 2% अधिक है। उन्होंने बताया कि देश के सभी बड़े गेहूं उत्पादक राज्यों में फसल परिपक्व हो चुकी है और कटाई का कार्य भी काफी हद तक पूरा हो चुका है।

मौसम ने दिया साथ, बढ़ी कटाई की रफ्तार
मंत्री चौहान ने बताया कि इस बार मौसम का रुख किसानों के पक्ष में रहा है। “गर्मी की लू और उच्च तापमान ने कटाई के कार्य को तेज करने में मदद की है। इसलिए अनुमानित उत्पादन पर मौसम का कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ेगा,” उन्होंने कहा।

कटाई की स्थिति 

मध्य प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात जैसे राज्यों में गेहूं की कटाई पूरी हो चुकी है।

पंजाब, उत्तर प्रदेश और बिहार में 2 मई तक कुछ क्षेत्रों में कटाई शेष थी, जो अब पूरी होने के कगार पर है।

भंडारण और खाद्य सुरक्षा की स्थिति मजबूत
भारत की खाद्य सुरक्षा स्थिति इस वक्त बेहद मजबूत बताई गई है।

गेहूं का भंडार 177.08 लाख टन तक पहुंच चुका है, जबकि बफर स्टॉक की जरूरत केवल 74.60 लाख टन है।

चावल का स्टॉक भी बफर जरूरत 135.80 लाख टन की तुलना में 389.05 लाख टन दर्ज किया गया है।

धान और दालों की बुवाई में भी तेजी
गेहूं के साथ-साथ जायद सीजन की फसलों की बुवाई में भी अच्छी प्रगति देखी गई है।

धान का रकबा 32.02 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है, जो पिछले साल के मुकाबले काफी अधिक है।

दलहनों का रकबा भी बढ़कर 20.67 लाख हेक्टेयर तक हो गया है, जिसमें मूंग और उड़द की हिस्सेदारी उल्लेखनीय है।

कृषि मंत्री ने अरहर, उड़द, चना और मसूर जैसी दालों की खरीद को MSP पर प्राथमिकता देने और समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

सब्जियों की बुवाई के लिए भी अनुकूल समय
बयान में यह भी कहा गया कि टमाटर, प्याज और अन्य सब्जियों की बुवाई के लिए अभी उपयुक्त समय है, और बाजार में मिल रहे अच्छे भाव के चलते किसानों को इन फसलों में भी अच्छी कमाई की उम्मीद है।

कुल मिलाकर, मौसम, सरकारी नीति और किसानों की मेहनत के इस त्रिकोण ने इस बार भारत की कृषि तस्वीर को बेहद सकारात्मक बना दिया है। गेहूं की रिकॉर्ड पैदावार न सिर्फ देश की खाद्य सुरक्षा को मजबूत करेगी, बल्कि उपभोक्ताओं के लिए भी यह खबर राहत भरी है कि अब आटे और गेहूं से जुड़े उत्पादों के दामों में कोई बड़ी उछाल नहीं आएगा।

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