वक्फ संशोधन बिल पर घमासान: सरकार और विपक्ष आमने-सामने, संसद में गरमाई बहस
नई दिल्ली: वक्फ (संशोधन) विधेयक को लेकर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। एक ओर जहां केंद्र सरकार इस बिल को पारित कराने की पूरी कोशिश में जुटी है, वहीं विपक्ष इसे वक्फ संपत्तियों के खिलाफ साजिश करार देते हुए कड़ा विरोध कर रहा है। इस मुद्दे पर लोकसभा में बहस होने वाली है, जिसके लिए स्पीकर ओम बिरला ने आठ घंटे का समय निर्धारित किया है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं की तरफ से तीखी बहस की संभावना जताई जा रही है।
विपक्ष ने साधा सरकार पर निशाना
ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना यासूब अब्बास ने भी इस बिल की आलोचना करते हुए कहा, “सरकार को जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी के सुझावों को गंभीरता से लेना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। यह बिल वक्फ संपत्तियों को नष्ट करने की साजिश है।”
इस बीच कांग्रेस ने विधेयक का विरोध करने की घोषणा कर दी है। पार्टी के नेता गौरव गोगोई, मोहम्मद जावेद और इमरान मसूद कांग्रेस का पक्ष लोकसभा में रखेंगे। वहीं, समाजवादी पार्टी की तरफ से अखिलेश यादव, मोहिबुल्लाह नदवी और इकरा हसन विपक्ष के स्वर को मजबूत करेंगे।
सरकार का पक्ष: बिल पारदर्शिता के लिए जरूरी
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि बिल पहले जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी को भेजा गया था, और विपक्ष ने भी यही मांग की थी। कमेटी के सुझाव कैबिनेट के पास भेजे गए, जहां भारत सरकार ने इन्हें स्वीकार किया। इसके बाद केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू संशोधन लेकर आए। अमित शाह ने जोर देते हुए कहा, “कैबिनेट के अनुमोदन के बिना कोई भी संशोधन विधेयक में शामिल नहीं किया गया। अगर समिति के विचारों को ही लागू नहीं करना था, तो फिर समिति बनाने का औचित्य ही क्या था? यह कांग्रेस के दौर की कमेटी नहीं है, जहां सबकुछ केवल दिखावे के लिए होता था।”
संसद में होगा जोरदार टकराव
लोकसभा में बिल के पक्ष में सबसे पहले बीजेपी नेता रविशंकर प्रसाद अपनी बात रखेंगे। वहीं, केसी वेणुगोपाल ने इस विधेयक को लेकर सवाल खड़े किए, जिस पर स्पीकर ओम बिरला ने साफ किया कि “सभी सरकारी और गैर-सरकारी संशोधन प्रस्तावों को समान समय दिया गया है। इसमें किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं किया गया है।”
एनडीए के घटक दल भी बिल पर अपनी राय रखने के लिए तैयार हैं। लोजपा के अरुण भारती और जदयू के लल्लन सिंह अपने-अपने दलों की ओर से समर्थन में पक्ष रखेंगे।
क्या है वक्फ संशोधन विधेयक और क्यों मचा बवाल?
वक्फ (संशोधन) विधेयक को लेकर विपक्ष का आरोप है कि यह मुस्लिम समुदाय की संपत्तियों को कमजोर करने और उन्हें सरकार के नियंत्रण में लाने की कोशिश है। वहीं, सरकार का दावा है कि इस विधेयक का उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना और वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में सुधार लाना है।
इस बिल के कारण देश की राजनीति गरमा गई है, और लोकसभा में होने वाली बहस में तीखी बयानबाजी देखने को मिल सकती है। देखना यह होगा कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर कितना टकराव होता है और क्या सरकार इस बिल को विपक्ष की आपत्तियों के बावजूद पारित कराने में सफल हो पाएगी।
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