क्या खत्म हो जाएगा वक्फ का वजूद? सुप्रीम कोर्ट में जंग तेज, नए कानून से हिल गई मुस्लिम संस्थाएं!
वक्फ कानून को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जबरदस्त सरगर्मी है। आज कोर्ट में इतनी भीड़ उमड़ी कि कई वकीलों को तक अंदर घुसने का मौका नहीं मिला। देश के सबसे बड़े न्यायालय में यह मामला अब केवल कानूनी नहीं, बल्कि सामाजिक और संवैधानिक बहस का मुद्दा बन गया है। सुप्रीम कोर्ट ने आज वक्फ कानून से जुड़ी 70 से ज्यादा याचिकाओं में से चुनी गई 10 महत्वपूर्ण याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई की। तीन सदस्यीय पीठ—CJI संजीव खन्ना, जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के वी विश्वनाथन—इन मामलों की सुनवाई कर रही है।
इन 10 याचिकाओं में AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी, अमानतुल्लाह खान, एसोसिएशन फॉर द प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स, अरशद मदनी, समस्त केरल जमीयतुल उलेमा, अंजुम कादरी, तैयब खान सलमानी, मोहम्मद शफी, मोहम्मद फजलुर्रहीम और राजद सांसद मनोज झा जैसे प्रमुख लोगों और संगठनों की याचिकाएं शामिल हैं।
क्या है वक्फ कानून पर आपत्ति की असल वजह?
मुस्लिम संगठनों का तर्क है कि नया वक्फ संशोधन कानून सरकार को वक्फ संपत्तियों पर अधिक नियंत्रण देने की कोशिश है। पहले वक्फ संपत्ति की पहचान का अधिकार वक्फ बोर्ड और ट्रिब्यूनल के पास था, लेकिन अब इसे डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर के अधीन कर दिया गया है। यह बदलाव विवाद का सबसे बड़ा कारण बन गया है।
पुराने कानून में, अगर किसी जमीन का वक्फ द्वारा लंबे समय से इस्तेमाल हो रहा था, तो दस्तावेजों की कमी के बावजूद उसे वक्फ की संपत्ति माना जाता था। लेकिन नए कानून से इस प्रथा को हटाकर ‘वक्फ बाय यूजर’ की अवधारणा को कमजोर किया जा रहा है। इससे कई संपत्तियों की वैधता पर सवाल उठ सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में क्या-क्या हुआ?
सुनवाई के दौरान सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने केंद्र सरकार पर तीखा सवाल उठाते हुए कहा कि कैसे सरकार यह तय कर सकती है कि केवल वे ही मुसलमान वक्फ बना सकते हैं जो पिछले पांच साल से इस्लाम का पालन कर रहे हैं? क्या सरकार यह तय करेगी कि कौन मुसलमान है और कौन नहीं?
सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया कि इस कानून का प्रभाव पूरे भारत पर पड़ेगा, इसलिए इसे केवल हाईकोर्ट तक सीमित रखना ठीक नहीं होगा। वहीं CJI संजीव खन्ना ने सुझाव दिया कि याचिकाओं को एक उच्च न्यायालय को ट्रांसफर किया जा सकता है, हालांकि सुप्रीम कोर्ट खुद इस मामले की सुनवाई और फैसला देने से वंचित नहीं है।
वादी पक्ष से पेश सीनियर एडवोकेट हुजेफा अहमदी ने कोर्ट से कहा कि ‘वक्फ बाय यूजर’ इस्लाम में एक स्थापित परंपरा है और इसे कानूनी रूप से हटाया नहीं जा सकता।
केंद्र सरकार की सफाई क्या रही?
केंद्र की ओर से कहा गया कि यह कानून किसी हड़बड़ी में नहीं लाया गया। इसके लिए संयुक्त संसदीय समिति (JPC) गठित की गई थी, जिसने 38 बैठकें कीं और 98.2 लाख ज्ञापनों की समीक्षा की। इसके बाद ही संसद के दोनों सदनों से यह पारित हुआ।
आज की सुनवाई का निष्कर्ष क्या रहा?
आज यानी बुधवार को 4.15 बजे सुनवाई समाप्त हुई। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है और अब इस बहुचर्चित मामले में अगली सुनवाई गुरुवार यानी कल होगी।
यह मामला अब महज एक कानूनी बहस नहीं, बल्कि धार्मिक, सामाजिक और संवैधानिक स्तर पर अधिकारों और सीमाओं की बड़ी लड़ाई बनता जा रहा है। कल क्या होगा? सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं।
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