क्या ‘विवाह’ की सादगी ने बना दिया था इसे ब्लॉकबस्टर? जानें इस फिल्म की सफलता का राज!
बॉलीवुड की फिल्म इंडस्ट्री में हर साल कई प्रकार की फिल्में बनती हैं, जिनमें एक्शन, थ्रिलर, आइटम नंबर, सस्पेंस और कई अन्य मसालेदार तत्व होते हैं। इन फिल्मों को दर्शक खूब पसंद करते हैं और बॉक्स ऑफिस पर अच्छा कलेक्शन भी करती हैं। लेकिन कुछ फिल्में ऐसी भी होती हैं, जो इन सभी ऐक्ट्स और मसालों के बिना सिर्फ अपनी सादगी और कहानी की दम पर बड़ी हिट साबित होती हैं। एक ऐसी ही फिल्म है ‘विवाह’ जो शाहिद कपूर और अमृता राव की जोड़ी के साथ 2006 में रिलीज हुई थी।
‘विवाह’ एक रोमांटिक ड्रामा फिल्म थी, जिसे सूरज बड़जात्या ने निर्देशित किया था। फिल्म ने अपनी नयापन से दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई और आज भी लोग इसे बार-बार देखना पसंद करते हैं। रिलीज के समय यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर साबित हुई थी और इसकी सफलता को देखकर किसी को भी यह अंदाजा नहीं था कि यह फिल्म इतना बड़ा हिट होगी। फिल्म के गाने भी काफी लोकप्रिय हुए, जिनमें “धन-धन धन्य है” और “मेरा प्यारा सपना” शामिल थे।
फिल्म की कमाई पर नजर डालें तो ‘विवाह’ ने अपने बजट से लगभग 4 गुना ज्यादा कमाई की। सैकनिल्क की रिपोर्ट के मुताबिक, इस फिल्म का बजट महज 8 करोड़ रुपये था, जबकि फिल्म ने 31.20 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया था। यह आंकड़ा फिल्म की सफलता को बयां करता है, और सबसे खास बात यह है कि फिल्म के बारे में यह अनुमान पहले ही लगाया जा रहा था कि यह फ्लॉप हो सकती है।
फिल्म की कहानी बाकी रोमांटिक ड्रामा से काफी अलग थी, क्योंकि इसमें सिर्फ लव स्टोरी नहीं बल्कि परिवार और रिश्तों की अहमियत भी दिखायी गई थी। यह वो समय था जब सूरज बड़जात्या जैसे निर्देशक के नाम से ही एक सफल लव स्टोरी की उम्मीद की जाती थी। ‘विवाह’ ने फिल्म में दिखाए गए पारिवारिक रिश्तों और शादी के महत्व को लेकर दर्शकों का दिल जीत लिया।
इस फिल्म में शाहिद कपूर और अमृता राव के अलावा आलोक नाथ, अमृता प्रकाश, अनुपम खेर, समीर सोनी, मनोज जोशी और लता सभरवाल जैसे बेहतरीन कलाकारों ने भी अहम भूमिका निभाई थी। उनके अभिनय ने फिल्म में जान डाल दी और इसे और भी खास बना दिया।
‘विवाह’ को अब OTT प्लेटफॉर्म पर भी देखा जा सकता है। फिल्म अब जी 5 पर उपलब्ध है, जिससे दर्शक कहीं भी और कभी भी इस फिल्म का आनंद ले सकते हैं। IMDb ने इस फिल्म को 5.6 की रेटिंग दी है, जो एक मिडिल-ग्राउंड रेटिंग है, लेकिन यह फिल्म दर्शकों के दिलों में आज भी जिंदा है।
हालांकि, यह फिल्म अपनी सादगी और पारिवारिक मूल्यों के साथ एक अलग पहचान बना चुकी है, यह सवाल आज भी है – क्या इस फिल्म की सफलता सिर्फ इसकी सादगी की वजह से थी? क्या यह फिल्म अपनी अलग शैली और कहानी के कारण ही इतनी लंबी अवधि तक लोगों के दिलों में बसी रही है?
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