April 19, 2026

पोप फ्रांसिस नहीं रहे: वेटिकन से आई खबर ने हिला दी पूरी दुनिया

आज सुबह वेटिकन से आई एक खबर ने पूरी दुनिया को स्तब्ध कर दिया जब यह पुष्टि हुई कि कैथोलिक ईसाइयों के सबसे बड़े धर्मगुरु, पोप फ्रांसिस का 88 साल की उम्र में निधन हो गया। कार्डिनल केविन फैरेल ने वेटिकन टीवी पर बताया कि स्थानीय समयानुसार सुबह 7:35 बजे पोप ने अंतिम सांस ली। लंबे समय से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे पोप फ्रांसिस को हाल ही में फेफड़ों में डबल निमोनिया और किडनी फेल होने की शिकायत थी। फरवरी में उन्हें रोम के जेमेली अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहाँ वे कई हफ्तों तक वेंटिलेटर पर रहे। मार्च में उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिली थी, लेकिन स्वास्थ्य में पूरी तरह सुधार नहीं हो पाया और आज उनका निधन हो गया।

पोप फ्रांसिस का असली नाम जॉर्ज मारियो बर्गोग्लियो था। उनका जन्म 17 दिसंबर 1936 को अर्जेंटीना में हुआ था। वे 2013 में 1300 वर्षों में पहले गैर-यूरोपीय और पहले लैटिन अमेरिकी पोप बने थे। उन्होंने चर्च की पारंपरिक चमक-दमक को त्यागकर एक सादगी भरा जीवन चुना। वे अपोस्टोलिक पैलेस की जगह एक साधारण वेटिकन गेस्ट हाउस में रहते थे। अपने कार्यकाल में उन्होंने चर्च के प्रति नजरिए को बदलने का साहसिक प्रयास किया – समलैंगिकों को चर्च में स्वीकार किया, पुनर्विवाह को धार्मिक मान्यता दी और यौन शोषण के मामलों पर सार्वजनिक रूप से माफी माँगी। वे गरीबों, प्रवासियों और समाज के हाशिए पर जी रहे लोगों के लिए एक मजबूत आवाज थे।

दुनियाभर के नेताओं ने उनके निधन पर शोक जताया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने X पर लिखा कि पोप फ्रांसिस के निधन से गहरा दुख हुआ है और दुनिया के कैथोलिक समुदाय के प्रति उन्होंने संवेदनाएं प्रकट की हैं। फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों ने उन्हें विनम्रता और करुणा का प्रतीक बताया, वहीं इटली की प्रधानमंत्री मेलोनी ने कहा कि पोप फ्रांसिस से उन्हें शिक्षा और सलाह मिली, जो उन्हें जीवन भर याद रहेगी। इज़राइल, जर्मनी और पूर्वी तिमोर के राष्ट्राध्यक्षों ने भी उन्हें शांति, करुणा और न्याय का प्रतीक बताया।

मृत्यु से कुछ दिन पहले ही पोप फ्रांसिस ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति से मुलाकात की थी, जो उनकी अंतिम आधिकारिक भेंट मानी जा रही है। पोप फ्रांसिस ने न केवल चर्च की परंपराओं को नए दृष्टिकोण से परिभाषित किया, बल्कि मानवता के पक्ष में मजबूती से खड़े होकर विश्व में एक नई नैतिक चेतना की शुरुआत की। उनका जाना सिर्फ एक धार्मिक नेता की मृत्यु नहीं है, बल्कि एक युग के अंत का संकेत है

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