पतंग के पीछे मासूम की जान पर बन आई: स्कूल गेट की सरिया सीने में घुसी, हालत नाज़ुक
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले से एक दर्दनाक हादसे की खबर सामने आई है, जहां महज 14 साल का एक मासूम लड़का पतंग के पीछे भागते हुए गंभीर रूप से घायल हो गया। फतेहपुर थाना क्षेत्र के गुरसेल गांव में रहने वाला आयुष कुमार पतंग उड़ा रहा था, लेकिन जैसे ही पतंग गांव के प्राथमिक विद्यालय के परिसर में जा गिरी, वह उसे लेने दौड़ पड़ा। स्कूल के मुख्य गेट से अंदर घुसने की कोशिश में आयुष का संतुलन बिगड़ा और गेट में लगी नुकीली लोहे की सरिया उसके दाहिने सीने में जा धंसी।
घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। आयुष की चीख सुनकर आसपास के लोग दौड़े और किसी तरह उसे गेट से अलग किया। उसे पहले फतेहपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां से हालत गंभीर बताकर जिला अस्पताल बाराबंकी रेफर कर दिया गया। हालांकि, परिजन आयुष को बेहतर इलाज के लिए एक निजी अस्पताल ले गए हैं, जहां फिलहाल उसका इलाज जारी है।
पीड़ित बच्चा गुरसेल गांव निवासी संतराम का बेटा है। हादसे के बाद से पूरा परिवार सदमे में है और उसकी जान की सलामती के लिए दुआ कर रहा है। यह घटना न सिर्फ परिवार के लिए बल्कि गांव के लोगों के लिए भी झकझोर देने वाली है। पतंगबाज़ी जैसी खेल में बच्चों की जान पर बन आना, एक बार फिर सुरक्षा और निगरानी पर सवाल खड़े करता है।
गौरतलब है कि यह कोई पहली घटना नहीं है जब पतंग के पीछे भागना जानलेवा साबित हुआ हो। इसी साल फरवरी में सहारनपुर के गंगोह में एक युवक छत से गिर गया था और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी। हाल ही में जुलाई में गाजियाबाद के विजयनगर इलाके में 10 साल का बच्चा पतंग उड़ाते हुए छत से नीचे गिर गया था और उसने भी इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
इन घटनाओं से सबक लेते हुए ज़रूरी है कि बच्चे जब छत या खुले इलाकों में पतंग उड़ाएं तो उनके साथ कोई वयस्क मौजूद हो, ताकि ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। पतंगबाज़ी भले ही एक मनोरंजन हो, लेकिन ज़रा सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।
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