April 24, 2026

शाहजहांपुर में यूपी एसटीएफ ने पकड़ा 2 क्विंटल 70 किलो गांजा, नशे के कारोबार पर सरकार की नाकामी उजागर

शाहजहांपुर में यूपी एसटीएफ और एसओजी टीम ने नशा माफिया के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए डीसीएम ट्रक से 2 क्विंटल 70 किलो गांजा बरामद किया है। पुलिस ने हिमाचल प्रदेश निवासी चालक सुभाष सिंह को मौके से गिरफ्तार कर लिया। बताया जा रहा है कि यह खेप उड़ीसा से लाई गई थी और इसे बरेली में सप्लाई किया जाना था। जब्त किए गए गांजे की कीमत लाखों रुपये बताई जा रही है। इस कार्रवाई से एक बार फिर यह सवाल खड़ा हो गया है कि प्रदेश में नशे का इतना बड़ा कारोबार आखिर सरकार और प्रशासन की नाक के नीचे कैसे फल-फूल रहा है।

सूत्रों के मुताबिक एसटीएफ को इनपुट मिला था कि गांजे की एक बड़ी खेप यूपी से होकर गुजरने वाली है। लोकेशन मिलने के बाद एसटीएफ ने एसओजी के साथ मिलकर शाहजहांपुर के तिलहर थाना क्षेत्र के नेशनल हाईवे-24 पर डीसीएम को घेर लिया। तलाशी के दौरान गाड़ी के अंदर चावल की भूसी के कट्टों के बीच 132 पैकेट गांजा बरामद हुआ। पुलिस का कहना है कि आरोपी सुभाष सिंह यह खेप उड़ीसा से सस्ते दामों पर खरीदकर लाया था, जिसे बरेली के सप्लायर सनम मिश्रा को पहुंचाया जाना था।

इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि जब नशे की इतनी बड़ी खेप सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय करके यूपी तक पहुंच जाती है, तो रास्ते भर सुरक्षा और जांच चौकियों पर जिम्मेदारी किसकी है? प्रदेश सरकार दावा करती है कि नशे के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई गई है, लेकिन इतनी बड़ी मात्रा में नशा धड़ल्ले से यूपी में एंट्री करता है तो यह सीधे-सीधे कानून-व्यवस्था और खुफिया तंत्र की पोल खोलता है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार के लाख दावों के बावजूद नशे का नेटवर्क गाँव-गाँव तक फैल चुका है और युवा पीढ़ी इसकी चपेट में आ रही है।

गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ में कई और नाम सामने आए हैं। पुलिस मान रही है कि यह कोई अकेला नेटवर्क नहीं है, बल्कि इसके तार दूसरे राज्यों तक फैले हुए हैं। एसटीएफ की मानें तो इस मामले में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं। लेकिन सवाल यह भी है कि जब नशे के कारोबारियों को पकड़ने के बाद ही बड़े नाम सामने आते हैं, तो खुफिया एजेंसियां पहले से इन नेटवर्क्स को क्यों नहीं तोड़ पा रही हैं? क्या यह कार्रवाई सिर्फ दिखावा है या सरकार वास्तव में इस समस्या को खत्म करना चाहती है?

शाहजहांपुर की इस कार्रवाई ने प्रदेश सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है। नशा कारोबार की जड़ें लगातार गहरी होती जा रही हैं और सरकारी दावों की हकीकत खुलकर सामने आ रही है। यदि समय रहते इस पर सख्ती नहीं बरती गई तो यह समस्या न सिर्फ कानून-व्यवस्था बल्कि आने वाली पीढ़ी के भविष्य के लिए भी गंभीर खतरा बन जाएगी। जनता अब यही पूछ रही है कि नशे के इस धंधे को रोकने में नाकाम सरकार आखिर कब जागेगी।

Share this content:

About The Author

error: Content is protected !!