फीनिक्स पलासियो मॉल के पीछे से कुख्यात साइबर फ्रॉड मॉड्यूल का सक्रिय सदस्य गिरफ्तार, देशभर में फैला था नेटवर्क
उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने गुरुवार देर रात साइबर ठगी के सबसे खतरनाक और तकनीकी रूप से उन्नत मॉड्यूल ‘डिजिटल अरेस्ट’ गिरोह पर बड़ी कार्रवाई की। टीम ने लखनऊ के गोमतीनगर विस्तार स्थित फीनिक्स पलासियो मॉल के पीछे से गैंग के सक्रिय सदस्य प्रदीप सोनी को गिरफ्तार किया। मध्य प्रदेश के विदिशा जिले का रहने वाला यह आरोपी वही शख्स निकला, जिसके नेटवर्क ने अप्रैल 2025 में लखनऊ के जाने-माने प्रोफेसर डॉ. बी.एन. सिंह को धमकाकर 95 लाख रुपये की ठगी की थी। एसटीएफ की इस गिरफ्तारी ने एक बार फिर साफ कर दिया कि साइबर अपराधियों ने लोगों को मानसिक रूप से जकड़ने की नई-नई तकनीकें विकसित कर ली हैं।
इस ‘डिजिटल अरेस्ट’ मॉड्यूल का पूरा खेल बेहद सुनियोजित तरीके से चलता था। ठग सबसे पहले ब्लू डॉट कूरियर कंपनी के नाम पर पीड़ित को कॉल करते थे और दावा करते थे कि उनके नाम से ड्रग्स या अवैध सामान वाला पार्सल पकड़ा गया है। इससे पहले कि पीड़ित कुछ समझ पाए, कॉल तुरंत एक फर्जी पुलिस अधिकारी ‘के. मोहनदास’ से जोड़ दी जाती थी। यह व्यक्ति पुलिस की वर्दी पहनकर व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर आता था और पूरी तरह कानूनी भाषा में धमकाते हुए पीड़ित को ‘डिजिटल अरेस्ट’ में बता देता था। परिवार को खतरा, गिरफ्तारी, केस दर्ज होने और जेल भेजने जैसी धमकियों से व्यक्ति का मानसिक संतुलन बिगाड़ दिया जाता था।
इसके बाद गैंग का अगला कदम होता था पीड़ित को RBI का फर्जी लेटर भेजना। कहा जाता था कि “सुरक्षा जांच” पूरी होने तक पैसे ट्रांसफर करना जरूरी है। इसी डर और मानसिक दबाव में फंसकर लोग अपनी जीवनभर की कमाई तक ठगों के बताए अकाउंट में भेज देते थे। इसी स्क्रिप्ट का शिकार हुए थे डॉ. बी.एन. सिंह, जिनसे ठगों ने 6 से 8 अप्रैल 2025 के बीच कुल 95 लाख रुपये निकलवाए। एसटीएफ जांच में पता चला कि जिस बैंक खाते में यह बड़ी राशि भेजी गई थी, उसमें पहले से ही 1.40 करोड़ रुपये साइबर फ्रॉड के घूम चुके थे।
ठगों ने सावधानी बरतते हुए 95 लाख रुपये को 420 छोटे-छोटे ट्रांजेक्शन में 11 अलग-अलग बैंक खातों में बांट दिया था। यह तरीका इसलिए अपनाया गया, ताकि ट्रांजेक्शन ट्रेल पकड़ना लगभग नामुमकिन हो जाए। एसटीएफ के मुताबिक, गिरोह एक देशव्यापी नेटवर्क के तहत फर्जी कॉल सेंटर, किराए के बैंक खाते और नकली डिजिटल आईडी का इस्तेमाल कर करोड़ों रुपये की ठगी कर चुका है। उनकी योजना और तकनीकें इतनी मजबूत थीं कि हर व्यक्ति को एक असली सरकारी प्रक्रिया जैसा अनुभव दिया जाता था।
इस मॉड्यूल के पहले भी दो सदस्य— मोहम्मद इकबाल और शाइन इकबाल — जुलाई 2025 में महाराष्ट्र के मीरा रोड से पकड़े जा चुके हैं। अब प्रदीप सोनी की गिरफ्तारी के बाद पूरे गिरोह के नेटवर्क की परतें तेज़ी से खुलने की उम्मीद है। एसटीएफ अधिकारियों ने दावा किया है कि यह कार्रवाई केवल शुरुआत है और जल्द ही गैंग के बाकी सदस्य भी गिरफ्त में होंगे। टीम का कहना है कि इस गैंग की पकड़ इतनी मजबूत थी कि देशभर के कई राज्यों में आम लोग से लेकर उच्च पदों पर बैठे लोग तक इनके जाल में फंस चुके हैं।
जांच एजेंसियां अब प्रदीप सोनी से पूछताछ कर पूरे सिंडिकेट के फंड फ्लो, बैकएंड ऑपरेटर और स्लीपर एजेंटों की जानकारी जुटा रही हैं। एसटीएफ ने आम जनता को भी चेताया है कि “डिजिटल अरेस्ट”, कूरियर पार्सल धोखाधड़ी और फर्जी पुलिस वीडियो कॉल जैसे नए तरीकों के प्रति जागरूक रहें और किसी भी ऐसी कॉल पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।
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