UP Budget 2025-26: इतिहास का सबसे बड़ा बजट, हर वर्ग को मिला तोहफा या चुनावी रणनीति?
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 8,08,736.06 करोड़ रुपये का अब तक का सबसे बड़ा बजट पेश किया। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने गुरुवार को विधानसभा में यह बजट पेश किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 9.8% अधिक है। सरकार ने इसे समावेशी विकास का बजट बताया, जिसमें वृद्धजनों, किसानों, अनुसूचित जाति, पिछड़े वर्ग, दिव्यांगजन और अल्पसंख्यकों के लिए कई महत्वाकांक्षी योजनाओं का ऐलान किया गया है।
पिछड़े वर्गों को साधने की कोशिश
योगी सरकार ने पिछड़े वर्गों के विकास को प्राथमिकता देते हुए पिछड़ा वर्ग पूर्वदशम एवं दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजना के लिए 2,825 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। साथ ही, पिछड़े वर्ग के निर्धन परिवारों की बेटियों की शादी में आर्थिक सहायता के लिए 200 करोड़ रुपये और कंप्यूटर प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए 35 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
किसानों और वृद्धजनों के लिए राहत
प्रदेश के वृद्धजनों और किसानों को हर महीने 1,000 रुपये पेंशन देने के लिए 8,105 करोड़ रुपये की बड़ी राशि तय की गई है। वहीं, मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना को बढ़ावा देने के लिए 550 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया है।
अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए विशेष योजनाएं
अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए पूर्वदशम एवं दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजना के तहत 968 करोड़ रुपये, जबकि सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए 900 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। वहीं, जनजातीय छात्रों की छात्रवृत्ति के लिए 6 करोड़ रुपये तय किए गए हैं।
प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान “पीएम-जनमन” के तहत विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के विकास के लिए अक्टूबर 2024 से अभियान शुरू किया गया है, जिसमें 63,000 से अधिक जनजातीय बाहुल्य गांवों को 18 विभागों के कार्यक्रमों से जोड़ा जाएगा।
दिव्यांगजनों के लिए बड़ी घोषणाएं
सरकार ने दिव्यांग भरण-पोषण अनुदान योजना के लिए 1,424 करोड़ रुपये, कृत्रिम श्रवण सहायक यंत्रों के लिए 35 करोड़ रुपये, और दिव्यांगों की बीमारी के इलाज हेतु 10 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया है।
बच्चों की विशेष जरूरतों को ध्यान में रखते हुए 03 से 07 वर्ष के दिव्यांग बच्चों के लिए ‘बचपन डे केयर सेंटर’ खोलने का भी फैसला लिया गया है।
अल्पसंख्यकों के लिए 1,998 करोड़ का बजट, विपक्ष ने साधा निशाना
अल्पसंख्यक समुदाय के उत्थान के लिए सरकार ने 1,998 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं, जिसमें उनकी शिक्षा के लिए पूर्वदशम एवं दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजना के तहत 365 करोड़ रुपये रखे गए हैं। विपक्ष ने इसे चुनावी रणनीति करार दिया और सवाल उठाया कि क्या सरकार वाकई समावेशी विकास चाहती है या यह सिर्फ वोटबैंक साधने का प्रयास है?
क्या यह बजट वाकई जनता के हित में है या महज 2027 चुनाव की तैयारी?
योगी सरकार के इस बजट में हर वर्ग को साधने की कोशिश की गई है। हालांकि, विपक्ष का दावा है कि यह बजट अगले चुनाव की रणनीति का हिस्सा है। सरकार की नीतियां कितनी प्रभावी होंगी, यह तो आने वाले समय में ही साफ होगा, लेकिन फिलहाल यह बजट राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है।
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