अफसरों की मनमानी पर सख्त हुआ शासन, विधायकों के फोन नहीं उठाने पर होगी कार्रवाई!
प्रदेश के जिलों में अधिकारियों की लापरवाही को लेकर शासन ने कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य सचिव के सख्त निर्देशों के बावजूद कई जिलों में अधिकारी विधायकों और सांसदों के फोन नहीं उठा रहे हैं और ना ही उन्हें कॉल बैक कर रहे हैं। इस तरह के मामलों को लेकर अब शासन ने अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश जारी कर दिए हैं।
सख्त निर्देश जारी, होगी कार्रवाई
प्रमुख सचिव संसदीय कार्य जेपी सिंह द्वारा अपर मुख्य सचिव, डीजीपी, मंडलायुक्त और डीएम को भेजे गए शासनादेश में कहा गया है कि विधायकों और सांसदों के प्रति शिष्टाचार और प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित किया जाए। बीते वर्षों में इस संबंध में कई निर्देश जारी किए गए थे, लेकिन मुख्य सचिव की हालिया वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के बावजूद कई अधिकारी अब भी इन्हें नजरअंदाज कर रहे हैं।
सदन में उठ रहा मामला, सरकार की हो रही किरकिरी
शासन के संज्ञान में आया है कि कई अधिकारी विधायकों और सांसदों के फोन नहीं उठाते और बाद में भी कॉल बैक नहीं करते। यह मुद्दा संसदीय अनुश्रवण समिति की बैठकों और सदन में उठाया जा रहा है, जिससे सरकार असहज स्थिति में आ रही है।
अब क्या करना होगा अधिकारियों को?
शासन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि –
✔️ अधिकारी विधायकों और सांसदों के नंबर अपने फोन में सेव करें।
✔️ कॉल आने पर तत्काल रिसीव करें।
✔️ यदि बैठक में हों, तो प्राथमिकता के आधार पर अनुपलब्धता का मैसेज भेजें और जल्द से जल्द कॉल बैक करें।
✔️ विधायकों द्वारा उठाए गए मामलों का शीघ्र समाधान करें और उन्हें अवगत कराएं।
अनदेखी करने वालों पर गिरेगी गाज!
शासन ने चेतावनी दी है कि यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी इन निर्देशों का पालन नहीं करता है, तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। सभी जिलाधिकारियों को सख्ती से इन निर्देशों को लागू कराने के लिए कहा गया है। अब देखना होगा कि इस आदेश के बाद अफसरों की कार्यशैली में बदलाव आता है या फिर सरकार को और कड़े कदम उठाने पड़ते हैं!
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