50 हजार में डिग्री से लेकर करोड़ों के घोटाले तक, मोनाड यूनिवर्सिटी की परतें खोल रहा है ईडी का शिकंजा
उत्तर प्रदेश के हापुड़ स्थित मोनाड यूनिवर्सिटी इन दिनों गंभीर आरोपों के चलते सुर्खियों में है। एक तरफ एसटीएफ ने विश्वविद्यालय में फर्जी डिग्रियों और मार्कशीट बनाने के संगठित रैकेट का पर्दाफाश किया है, तो दूसरी ओर ईडी अब इस पूरे मामले में आर्थिक अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच में जुट गई है।
एडीजी लॉ एंड ऑर्डर अमिताभ यश ने बताया कि यूनिवर्सिटी द्वारा फर्जी डिग्री जारी किए जाने की शिकायतों पर एक टीम गठित की गई थी। जांच डीएसपी संजीव दीक्षित को सौंपी गई, जिनकी अगुवाई में एसटीएफ ने शनिवार को बड़ी कार्रवाई की।
हरियाणा निवासी संदीप कुमार उर्फ संदीप सेहरावत को पकड़े जाने के बाद पूरे रैकेट का खुलासा हुआ। उसने स्वीकार किया कि वह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन बिजेंद्र सिंह हुड्डा के निर्देश पर बीएड, बीए, बीटेक, बीए एलएलबी और फार्मेसी जैसे कोर्स की फर्जी डिग्रियां छापता था। उसके साथ राजेश नाम का शख्स भी इस नेटवर्क में शामिल था। इन डिग्रियों की कीमत कोर्स के मुताबिक 50 हजार से 4 लाख रुपये तक तय की गई थी।
एसटीएफ ने मोनाड यूनिवर्सिटी में छापा मारकर चेयरमैन विजेंद्र सिंह हुड्डा सहित कुल 9 लोगों को गिरफ्तार किया और मौके से 1372 फर्जी मार्कशीट और दस्तावेज बरामद किए।
अब इस पूरे मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की भी एंट्री हो चुकी है। ईडी पहले से ही चर्चित बाइक बोट घोटाले की जांच कर रही है, और संदेह है कि उस घोटाले की काली कमाई को ही विजेंद्र सिंह हुड्डा ने मोनाड यूनिवर्सिटी में लगाया था।
इस खुलासे ने शिक्षा के नाम पर चल रहे इस फर्जीवाड़े की गहराई को उजागर कर दिया है। मामले की जांच अब फॉरेंसिक स्तर पर की जा रही है और इसमें कई और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
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