April 30, 2026

राष्ट्रीय हिंदू रक्षा परिषद की बैठक: लखनऊ में गौ-रक्षा, धर्मरक्षण और सामाजिक एकता पर जोर

24 सितंबर दिन बुधवार को बैठक गोमती नगर,लखनऊ, उत्तर प्रदेश, में संपस हुई। राष्ट्रीय हिंदू रक्षा परिषद की इस बैठक में संगठन के शीर्ष अधिकारियों कार्यकर्ताओं और कई क्षेत्रीय समन्वयकर्ताओं ने भाग लिया। और देश में बढ़ती चुनौतियों के सन्दर्भ में विस्तृत रूप से रणनीति तय की गई। बैठक की शुरुआत समाज में बढ़ते कुठराघात, धार्मिक स्थलों पर हो रहे अपमान तथा गोवंश और महिलाओं के प्रति बढ़ती हिंसा की गंभीर परिस्थितियों पर चर्चा हुई।

राष्ट्र्रीय महासचिव श्री मुकेश दुबे ने बैठक में बोलते हुए गौ हत्या एवं गौ संरक्षण पर विशेष जोर दिया तथा कहा कि हमारी संस्कृति और धर्म के मूल्यों की रक्षा अब प्राथमिक कर्तव्य बन चुकी है। उन्होंने उद्धरण दिया — “अहिंसा परमो धर्मः, धर्महिंसा तदैव च:” — और समझाया कि अहिंसा मनुष्य का परम धर्म है परन्तु धर्म और संस्कृति की रक्षा हेतु आवश्यक कदम उठाना भी उतना ही ज़रूरी है। राष्ट्रीय महासचिव जी ने चेतावनी दी कि यदि समाज सतर्क नहीं हुआ तो परम्परागत संस्थाएँ कमजोर पड़ सकती हैं और इसलिए संगठित प्रयासों की अत्यधिक आवश्यकता है।

बैठक में संगठन ने देश में सामाजिक एकात्म स्थापित करने का संकल्प दोहराया। वक्ताओं ने कहा कि जातिगत, भाषागत और क्षेत्रीय दंगों को बढ़ावा देने वाली ताकतें हमारे समाज को टुकड़ों में बाँट रही हैं, और इनके विरुद्ध संगठित, वैचारिक तथा सामजिक प्रयासों की तीव्र आवश्यकता है। इस संदर्भ में परिषद ने शिक्षा, चेतना केन्द्र और गुरूकुल स्तर पर व्यापक अभियान चलाने तथा सभ्य नागरिकता और पारस्परिक सम्मान की भावना को प्रवर्धित करने का निर्णय लिया।

एजेंडा के अंतर्गत कुल पंद्रह प्रमुख बिंदुओं पर गहन विचार-विमर्श हुआ। इनमें गौ हत्या पर कठोर दण्ड के प्रावधान हेतु कानूनी पहल, भारत को हिंदू राष्ट्र के रूप में स्थापित करने की वैचारिक व संवैधानिक बातचीत आरम्भ करने, धर्मांतरण और कथित “लव जिहाद” के मामलें पर तंत्रों के साथ समन्वय कर रोकथाम के उपाय करना शामिल था। साथ ही गौ माता को राष्ट्र माता घोषित करने के प्रस्ताव, गोवंश संरक्षण एवं विकास पर दीर्घकालिक कार्यक्रम और “एक देश एक कानून” के सिद्धांत पर विचार-विमर्श भी प्रमुख रहे।

बैठक में महिला सुरक्षा तथा महिलाओं के सम्मान और सहभागिता को बढ़ाने पर विशेष बल दिया गया। यह घोषित किया गया कि महिलाओं के साथ होने वाले अन्यायों को रोकने और प्रभावितों को न्याय दिलाने हेतु आत्मरक्षा प्रशिक्षण, कानूनी सहायता, तथा समर्पित चेतना अभियानों का आयोजन किया जाएगा। संगठन ने बताया कि इन पहलों का लक्ष्य सामाजिक सुरक्षा और समान भागीदारी सुनिश्चित करना है, जिससे महिलाओं का आत्मविश्वास और सहभागिता दोनों बढ़ें।

राष्ट्रीय हिंदू रक्षा परिषद ने देशभर में प्रखण्ड स्तर पर गुरूकुल व चेतना केन्द्र स्थापित करने की रूपरेखा प्रस्तुत की, ताकि स्थानीय स्तर पर सांस्कृतिक शिक्षा, नागरिक प्रशिक्षण और आत्मरक्षा का स्थायी काम चल सके। ऐसे केन्द्रों के माध्यम से युवा पीढ़ी को पारंपरिक ज्ञान के साथ-साथ आधुनिक कानूनी व नागरिक कर्तव्यों की भी समझ दी जाएगी। परिषद ने यह स्पष्ट किया कि दीक्षित कार्यक्रम शांति, सम्मान और कानूनी जागरूकता पर आधारित होंगे।

प्रदेश संयोजक श्री कुलदीप शुक्ला ने मंच से उपस्थित कार्यकर्ताओं और स्थानीय समन्वयकों का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि संगठन को व्यापक जनसमर्थन ही इसकी वास्तविक ताकत बना सकता है। उन्होंने उपस्थित लोगों से आह्वान किया कि अधिक से अधिक लोगों को जोड़ा जाए और स्थानीय स्तर पर जागरूकता और सहयोग को बढ़ाया जाए। श्री कुलदीप शुक्ला ने विशेष रूप से उन सभी कार्यकर्ताओं का उल्लेख कर उनका आभार व्यक्त किया जो समय पर उपस्थित रहे और कार्यक्रम को सफल बनाया। साथ ही उन्होंने सूचित किया कि राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार दुबे आगामी बैठक में व्यक्तिगत रूप से मार्गदर्शन देंगे क्योंकि वे आज उपस्थित नहीं थे; अगले सत्र में उनसे मिलकर नीति-निर्देशन लिया जाएगा।

प्रदेश उपाध्यक्ष श्री ज्योति प्रकाश तिवारी ने बैठक में कहा कि समाज में जिन भी व्यक्तियों या समूहों ने किसी भी समुदाय के प्रति अन्याय या अपराध किए हैं, उनके विरुद्ध ठोस साक्ष्यों के आधार पर कानूनी और वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। श्री तिवारी ने जोर देकर कहा कि किसी भी प्रकार का गलत कृत्य स्वीकार्य नहीं है और न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से ही जवाबदेही तय की जानी चाहिए; साथ ही उन्होंने सामुदायिक संवाद व शान्ति बनाये रखने पर भी ज़ोर दिया।

अंत में परिषद ने आम नागरिकों से निष्पक्ष सहयोग और संयम का आह्वान किया। परिषद ने पुनः स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य हिस्ट्री, संस्कृति और पारिवारिक परंपराओं की सुरक्षा करना है—न कि किसी समुदाय के खिलाफ घृणा या हिंसा फैलाना। अगले चरणों में संस्था कानूनी, शैक्षिक और सामुदायिक माध्यमों से योजनाबद्ध उपाय अपनाएगी और समय-समय पर जनता को जानकारी देती रहेगी।

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