May 1, 2026

UNSC में भारत का करारा प्रहार: पाकिस्तान ने की थी 4 लाख महिलाओं से दरिंदगी, भारत ने किया पर्दाफाश

भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वथनेनी हरीश ने संयुक्त राष्ट्र में उठाया मुद्दा, बोले— “पाकिस्तान झूठ और हिंसा से दुनिया का ध्यान भटकाता है”

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की बैठक में भारत ने पाकिस्तान की पोल दुनिया के सामने खोल दी. भारत के स्थायी प्रतिनिधि पर्वथनेनी हरीश ने पाकिस्तान में महिलाओं की दयनीय स्थिति और ऐतिहासिक अत्याचारों पर कड़ा प्रहार किया. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान वह देश है जिसने अपने ही नागरिकों पर नरसंहार किया और 1971 के ऑपरेशन सर्चलाइट के दौरान करीब 4 लाख महिलाओं के साथ सामूहिक बलात्कार किया. भारत ने इस बहस के दौरान महिलाओं की सुरक्षा, शांति और समानता के मुद्दे को मजबूती से उठाया.

हरीश ने कहा कि हर साल संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान भारत के खिलाफ झूठा प्रचार करता है, खासकर जम्मू-कश्मीर को लेकर. उन्होंने कहा, “हम हर साल पाकिस्तान की बेतुकी बयानबाजी सुनने के लिए मजबूर होते हैं, जो अपने देश की विफलताओं को छिपाने के लिए भारत को बदनाम करने की कोशिश करता है.” उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान एक ऐसा देश है जो अपने ही लोगों पर बमबारी करता है और फिर खुद को शांति का पक्षधर बताता है.

भारत ने इस दौरान पाकिस्तान की महिलाओं के प्रति क्रूर नीतियों का भी जिक्र किया. पर्वथनेनी हरीश ने बताया कि 1971 में हुए ऑपरेशन सर्चलाइट के दौरान पाकिस्तानी सेना ने हजारों निर्दोष लोगों की हत्या की थी और लगभग 4 लाख महिलाओं का बलात्कार किया था. उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक सच्चाई को अब दुनिया नज़रअंदाज़ नहीं कर सकती और पाकिस्तान के झूठे नैरेटिव को अब कोई गंभीरता से नहीं लेता.

भारत के प्रतिनिधि ने आगे कहा कि जबकि पाकिस्तान महिलाओं के अधिकारों को कुचलने का इतिहास रखता है, भारत महिलाओं को शांति स्थापना में अग्रणी भूमिका देने में विश्वास रखता है. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि भारत की पहली आईपीएस अधिकारी डॉ. किरण बेदी वर्ष 2003 में संयुक्त राष्ट्र पुलिस डिवीजन की पहली महिला सलाहकार बनी थीं. भारत ने हमेशा से महिला शांति सैनिकों को प्रोत्साहित किया है ताकि वैश्विक स्तर पर लैंगिक समानता को मजबूत किया जा सके.

हरीश ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि भारत यह मानता है कि अब यह सवाल नहीं है कि महिलाएं शांति मिशनों का हिस्सा बन सकती हैं या नहीं, बल्कि यह कि क्या शांति मिशन महिलाओं के बिना संभव हैं? उन्होंने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के शब्दों का हवाला देते हुए कहा, “महिला शांति सैनिक वास्तव में ‘शांति की दूत’ हैं, जो समाज में स्थायी और समावेशी बदलाव लाने की क्षमता रखती हैं.”

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