ट्रंप के फैसलों से अमेरिका को आर्थिक संकट का सामना, मंदी की आशंका बढ़ी
डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति पद संभालने के बाद लिए गए कई विवादित फैसलों से अमेरिका की अर्थव्यवस्था पर भारी असर पड़ा है। अमेरिकी राष्ट्रपति बनने के बाद ट्रंप ने ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति अपनाई और वैश्विक स्तर पर कई देशों पर टैरिफ (आयात शुल्क) बढ़ाए, जिससे व्यापार युद्ध छिड़ गया। इसके चलते अमेरिकी अर्थव्यवस्था की गति धीमी हो गई है और मंदी का खतरा मंडराने लगा है।
अर्थव्यवस्था की विकास दर इस वर्ष घटकर 1.6 प्रतिशत रह सकती है, जो पिछले साल 2.8 प्रतिशत थी। यह जानकारी आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (OECD) की रिपोर्ट में दी गई है। संगठन के अनुसार, ट्रंप की नीतियों ने औसत अमेरिकी शुल्क दर 2.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 15.4 प्रतिशत कर दी है, जो 1938 के बाद सबसे अधिक है। इससे उपभोक्ताओं और व्यवसायों की लागत बढ़ी है।
वैश्विक असर
इस व्यापार युद्ध के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था की गति भी सुस्त हो गई है। इस वर्ष वैश्विक आर्थिक वृद्धि दर घटकर 2.9 प्रतिशत रह जाएगी, जो पिछले वर्षों के मुकाबले काफी कम है।
अमेरिका में स्थिति
जनवरी-मार्च 2025 की पहली तिमाही में अमेरिका के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में 0.2 प्रतिशत की गिरावट आई है।
यह तीन साल में पहली बार GDP में गिरावट है।
भारी आयात शुल्क से कंपनियों ने आयात में तेजी दिखाई, जिससे आर्थिक अनिश्चितता और बढ़ी।
ट्रंप के फैसलों से अमेरिकी अर्थव्यवस्था सुस्त पड़ गई है और बेरोजगारी बढ़ने का खतरा भी है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस अनिश्चित व्यापार युद्ध का असर दीर्घकालीन होगा और अमेरिका को आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
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