ट्रंप का ‘टैरिफ अटैक’: वैश्विक व्यापार युद्ध की आहट, कई देशों की GDP को बड़ा झटका
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को ‘रेसिप्रोकल टैरिफ’ की घोषणा करते हुए लगभग सभी देशों से होने वाले आयातों पर 10% टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। कुछ देशों पर यह शुल्क और भी ज्यादा लगाया गया है, जिससे वैश्विक व्यापार पर मंदी के बादल मंडराने लगे हैं। ट्रंप ने इसे अमेरिका के लिए ‘आर्थिक स्वतंत्रता की घोषणा’ करार दिया है, जबकि कई देश इस कदम पर जवाबी कार्रवाई की तैयारी कर रहे हैं।
भारत पर 26% टैरिफ, चीन पर सबसे बड़ा वार
ट्रंप प्रशासन ने भारत से होने वाले आयात पर 26% टैरिफ लगाया है, जो यूरोपीय संघ (20%), जापान (24%) और दक्षिण कोरिया (25%) से अधिक है। वहीं, व्यापारिक प्रतिद्वंद्वी चीन पर कुल 54% शुल्क लगा दिया गया है, जिसमें पहले से मौजूद 20% के अलावा नया 34% टैरिफ जोड़ा गया है। इस बढ़े हुए शुल्क से चीन को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ सकता है।
भारत की GDP पर मामूली असर, लेकिन अन्य देशों की मुश्किलें बढ़ीं
आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार, भारत की GDP पर इस टैरिफ का बहुत मामूली प्रभाव पड़ेगा। रिपोर्ट के मुताबिक, बिना किसी जवाबी कार्रवाई के भारत की GDP में 0.01% से 0.10% तक की गिरावट हो सकती है। अगर टैरिफ का प्रभाव बढ़ता है, तो यह नुकसान 0.20% तक पहुंच सकता है।
हालांकि, अन्य देशों पर इसका असर कहीं ज्यादा दिख सकता है। विश्लेषकों के अनुसार,
मैक्सिको की GDP में 2% की गिरावट संभावित है, जिससे 36.4 अरब डॉलर का नुकसान हो सकता है।
कनाडा को 1.05% GDP गिरावट के साथ 24.5 अरब डॉलर का घाटा उठाना पड़ सकता है।
वियतनाम (-0.99%), थाईलैंड (-0.93%), ताइवान (-0.68%), स्विट्जरलैंड (-0.59%), दक्षिण कोरिया (-0.58%) को भी भारी नुकसान होने की आशंका है।
चीन की GDP को 0.48%, जापान को 0.19% और इंडोनेशिया को 0.20% का नुकसान झेलना पड़ सकता है।
अमेरिका की अपनी GDP भी 0.49% घट सकती है, जिससे घरेलू स्तर पर भी चिंताएं बढ़ सकती हैं।
वैश्विक मंदी की आशंका, कई देश पलटवार की तैयारी में
ट्रंप के इस टैरिफ अटैक के बाद कई देशों ने जवाबी शुल्क लगाने का संकेत दिया है। अगर वैश्विक स्तर पर टैक्स वॉर तेज हुआ, तो दुनिया भर की अर्थव्यवस्था पर मंदी का खतरा बढ़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक GDP को इस टैरिफ वॉर से भारी नुकसान हो सकता है और व्यापार संतुलन में बड़ी उथल-पुथल देखने को मिल सकती है।
अब देखना होगा कि भारत सहित अन्य देश इस अमेरिकी टैरिफ नीति का क्या जवाब देते हैं और आने वाले समय में वैश्विक व्यापार की दिशा क्या मोड़ लेती है।
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