April 19, 2026

ट्रंप प्रशासन का हार्वर्ड यूनिवर्सिटी पर बड़ा एक्शन, 2.3 बिलियन डॉलर की फंडिंग पर लगाई रोक

अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी को मिलने वाली करीब 2.3 बिलियन डॉलर की फंडिंग पर रोक लगा दी है। यह फैसला 14 अप्रैल को लिया गया, जब विश्वविद्यालय ने व्हाइट हाउस की मांगों को मानने से इनकार कर दिया। ट्रंप प्रशासन ने हार्वर्ड से कैंपस में विरोध-प्रदर्शनों को सीमित करने और विविधता, समानता और समावेश (DEI) से जुड़े कार्यक्रमों को बंद करने की मांग की थी। यह कदम यहूदी विरोधी घटनाओं से निपटने के लिए बनाई गई एक सरकारी टास्क फोर्स की सिफारिश के आधार पर उठाया गया है। इस फंडिंग में 2.2 बिलियन डॉलर का अनुदान और 60 मिलियन डॉलर के सरकारी अनुबंध शामिल हैं। टास्क फोर्स का कहना है कि हार्वर्ड का रवैया देश के प्रमुख शिक्षण संस्थानों में बढ़ती तानाशाही सोच का प्रतीक है।

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष एलन गार्बर ने ट्रंप प्रशासन की मांगों को खारिज करते हुए इसे विश्वविद्यालय की स्वतंत्रता में हस्तक्षेप करार दिया है। उन्होंने छात्रों और स्टाफ को भेजे पत्र में स्पष्ट किया कि किसी भी सरकार को यह अधिकार नहीं होना चाहिए कि वह किसी निजी शैक्षणिक संस्थान को यह निर्देश दे कि वहां क्या पढ़ाया जाए, किसे दाखिला दिया जाए, और कौन से विषयों पर शोध किया जाए। गार्बर ने कहा कि प्रशासन की यह मांग अमेरिका के संविधान के पहले संशोधन और टाइटल VI कानून का उल्लंघन करती है, जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और भेदभाव से सुरक्षा की गारंटी देता है।

राष्ट्रपति ट्रंप ने शुक्रवार को हार्वर्ड को एक पत्र लिखकर यूनिवर्सिटी प्रशासन और नेतृत्व में बदलाव की मांग की थी। इसके साथ ही उन्होंने एडमिशन पॉलिसी की समीक्षा, विविधता से जुड़ी पहलों का पुनर्मूल्यांकन और कुछ छात्र क्लबों की मान्यता रद्द करने की सिफारिश की। ट्रंप प्रशासन ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर हार्वर्ड ने उनकी शर्तें नहीं मानीं, तो उसे मिलने वाले लगभग 9 बिलियन डॉलर के फंड और अनुबंधों पर भी संकट आ सकता है।

हार्वर्ड इस दबाव का अकेला शिकार नहीं है। शिक्षा विभाग ने पेनसिल्वेनिया यूनिवर्सिटी, ब्राउन और प्रिंसटन यूनिवर्सिटी की फंडिंग भी विवादों के चलते रोक दी है। कोलंबिया यूनिवर्सिटी को भी अरबों डॉलर की ग्रांट रोके जाने की धमकी दी गई थी, जिसके बाद उसने अपनी नीतियों में बदलाव किए। गार्बर ने माना कि यूनिवर्सिटी ने यहूदी विरोधी घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए कई कदम उठाए हैं, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे बदलाव हार्वर्ड केवल अपने सिद्धांतों और निर्णयों के अनुसार करेगा, न कि किसी सरकारी दबाव में।

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