2.85 करोड़ में घर बेचा, टैक्स नहीं दिया और नोटिस मिला… फिर जो हुआ
हाल ही में प्रॉपर्टी खरीद-बिक्री से जुड़े एक दिलचस्प मामले में पायल नाम की महिला चर्चा में आई हैं। पायल और उनके पति ने मिलकर खरीदा हुआ एक पुराना घर 2.85 करोड़ रुपये में बेचा, जिससे उन्हें 91 लाख रुपये का लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन हुआ। इसके बाद कपल ने इस राशि का उपयोग करते हुए 3.05 करोड़ रुपये में नया घर खरीदा।
आयकर अधिनियम की धारा 54 के तहत ऐसा माना जाता है कि यदि कोई व्यक्ति पुरानी आवासीय संपत्ति बेचकर लाभ का इस्तेमाल नए घर की खरीद या निर्माण में करता है, तो उस लाभ पर कैपिटल गेन टैक्स नहीं देना पड़ता। पायल ने भी इसी आधार पर अपनी आयकर रिटर्न में टैक्स छूट का दावा किया।
लेकिन आयकर विभाग ने उनकी रिटर्न को चुनौती दी। विभाग का कहना था कि नए घर की खरीद बिक्री की तारीख से एक साल पहले की अवधि के नियमों के तहत नहीं हुई थी। इस वजह से उन्होंने पायल को नोटिस जारी कर धारा 54 के तहत छूट को खारिज कर दिया।
पायल ने इस नोटिस के खिलाफ न्यायिक लड़ाई शुरू की और तर्क दिया कि नए घर की खरीद उनके कुल संपत्ति का हिस्सा थी और बिक्री से मिले पैसे का पूरा इस्तेमाल नए घर में किया गया। इस आधार पर उन्होंने धारा 54 के तहत टैक्स छूट का दावा बनाए रखा।
मामला अंततः ITAT मुंबई तक गया। ITAT ने पायल की दलीलों को स्वीकार किया और आयकर अधिकारियों के फैसले को उलट दिया। ITAT ने माना कि पायल ने सही तरीके से नया घर खरीदा था और उनके लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पर टैक्स नहीं लगाना चाहिए।
इस मामले से यह सीख मिलती है कि कैपिटल गेन टैक्स की छूट लेने के लिए धारा 54 की शर्तों को ठीक से समझना जरूरी है। वहीं अगर टैक्स अधिकारी का निर्णय गलत लगे, तो कानूनी लड़ाई लड़कर अपनी सही बात साबित की जा सकती है।
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