देश में टैक्स कट लागू, प्राइस कट पर सरकार की पैनी नजर
देश में जीएसटी दरों में कटौती लागू हो चुकी है और 90 फीसदी से ज्यादा प्रोडक्ट्स पर टैक्स कम हो गया है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आम उपभोक्ताओं तक इसका फायदा कब और कैसे पहुंचेगा। सरकार ने साफ कर दिया है कि वह इस पूरी प्रक्रिया पर नजर बनाए हुए है। अधिकारियों के अनुसार कंपनियों को टैक्स कटौती का फायदा उपभोक्ताओं तक पहुंचाना होगा और यदि मुनाफाखोरी की शिकायतें सामने आती हैं तो सरकार भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) को सक्रिय कर सकती है। हालांकि, फिलहाल सरकार प्रशासनिक हस्तक्षेप से बचना चाहती है और कंपनियों को खुद इस दिशा में कदम उठाने का मौका दे रही है।
कंपनियों ने अपनी पब्लिक कमिटमेंट्स और विज्ञापनों में दावा किया है कि वे प्राइस कट करेंगी। बीमा कंपनियों से लेकर सीमेंट, टायर, दवा और एफएमसीजी कंपनियों ने अखबारों और टीवी विज्ञापनों के जरिए इस वादे को दोहराया है। इसके बावजूद रिटेलर्स तक रिवाइज्ड रेट लिस्ट पहुंचाना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। सरकार ने उद्योगों को जिम्मेदारी सौंपी है कि वे डीलर्स को निर्देशित करें कि उपभोक्ताओं से वसूली जाने वाली कीमत टैक्स कटौती को दर्शाए। इसके लिए कंपनियों को अपने पुराने स्टॉक पर भी रिवाइज्ड प्राइस स्टिकर लगाने की सलाह दी गई है, ताकि उपभोक्ताओं को कीमतों में बदलाव का तुरंत अंदाजा हो सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उपभोक्ताओं तक यह लाभ पारदर्शिता से पहुंचता है तो इससे बाजार में मांग बढ़ेगी और आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी। भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) ने अपने सदस्यों को प्रोत्साहित किया है कि वे टैक्स कटौती का लाभ बिना देरी के उपभोक्ताओं तक पहुंचाएं। सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा कि प्राइस लिस्ट अपडेट करने और सप्लाई चेन को पुनर्गठित करने का काम तेजी से किया जा रहा है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी साफ कहा है कि टैक्स कटौती का सबसे बड़ा मकसद आम लोगों को राहत देना है। उन्होंने इसे अपनी “अगली बड़ी परीक्षा” करार देते हुए कहा था कि टैक्स स्लैब में कटौती का असर पैकेज्ड फूड, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स, पर्सनल हेल्थ और इंश्योरेंस पॉलिसीज, होटल, ऑटोमोबाइल, सीमेंट और किचन आइटम्स जैसे कई क्षेत्रों में दिखना चाहिए। सरकार चाहती है कि कंपनियां खुद जिम्मेदारी से यह कदम उठाएं ताकि उपभोक्ताओं को महंगाई से राहत मिल सके और देश की ग्रोथ में भी तेजी आए।
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