टाटा ग्रुप में विवादित ईमेल से मचा हड़कंप, टाटा ट्रस्ट में सत्ता संघर्ष पर सरकार करेगी हस्तक्षेप
टाटा ग्रुप के अंदरूनी मतभेद अब गंभीर मोड़ पर पहुंच गए हैं। टाटा ट्रस्ट्स के सदस्यों में सत्ता को लेकर बढ़ते टकराव के बीच सरकार ने हस्तक्षेप का फैसला किया है। इस हफ्ते दो केंद्रीय मंत्री समूह के शीर्ष अधिकारियों से मुलाकात करेंगे।
देश के सबसे बड़े बिजनेस समूह टाटा ग्रुप में एक बार फिर उथल-पुथल मच गई है। हाल ही में सामने आए एक विवादित ईमेल ने पूरे संगठन में हड़कंप मचा दिया है। बताया जा रहा है कि इस ईमेल में टाटा ट्रस्ट्स के एक वरिष्ठ सदस्य को बोर्ड से हटाने की धमकी दी गई है। इस घटनाक्रम को टाटा संस पर कब्जा करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। मामला इतना गंभीर हो गया है कि अब केंद्र सरकार को इसमें दखल देना पड़ रहा है।
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस हफ्ते दिल्ली में केंद्रीय मंत्री टाटा ग्रुप के शीर्ष अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। बैठक में टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा, वाइस-चेयरमैन वेणु श्रीनिवासन, और टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहेंगे। सरकार चाहती है कि ट्रस्ट के भीतर के विवादों का असर समूह की कंपनियों और निवेशकों पर न पड़े।
सूत्रों के मुताबिक, विजय सिंह को अचानक बोर्ड से हटाए जाने के बाद टाटा ट्रस्ट्स के अंदर तनाव बढ़ गया है। नोएल टाटा और वेणु श्रीनिवासन ने इस फैसले का विरोध किया था। वहीं, कुछ ट्रस्टियों ने इसका समर्थन किया। अब एक ईमेल के जरिए यह संदेश भेजा गया है कि श्रीनिवासन को भी बोर्ड से हटाया जा सकता है, जिससे माहौल और बिगड़ गया है।
इस बीच, टाटा संस की लिस्टिंग को लेकर दबाव भी बढ़ रहा है। RBI ने कंपनी को पब्लिक लिस्टिंग का निर्देश दिया था, जिसकी समय सीमा 30 सितंबर को समाप्त हो गई। हालांकि, कंपनी ने NBFC कैटेगरी से हटने के लिए आवेदन दिया है ताकि उसे इस नियम से राहत मिल सके।
अब सरकार की कोशिश है कि टाटा ट्रस्ट्स में चल रही खींचतान को सुलझाया जाए और समूह की कंपनियों के संचालन पर कोई असर न पड़े। फिलहाल ट्रस्ट के अंदर कई बोर्ड सीटें खाली हैं, जिससे निर्णय प्रक्रिया पर असर पड़ रहा है। वित्तीय पारदर्शिता और ट्रस्टी के हितों के टकराव को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
इस विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि रतन टाटा के बाद टाटा ग्रुप की विरासत को कौन संभालेगा, और क्या समूह अपनी पुरानी स्थिरता और विश्वसनीयता बनाए रख पाएगा।
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