तालिबान नेता का बड़ा बयान: अफगानिस्तान में लोकतंत्र की कोई जगह नहीं, शरिया कानून की जीत!
अफगानिस्तान में तालिबान नेता हिबतुल्लाह अखुंदजादा ने पश्चिमी देशों के लोकतांत्रिक कानूनों को खारिज करते हुए कहा कि जैसे-जैसे शरिया कानून लागू हो रहा है, वैसे-वैसे अफगानिस्तान में लोकतंत्र का अंत हो रहा है। उन्होंने ये टिप्पणी कंधार की ईदगाह मस्जिद में ईद-उल-फितर के मौके पर की और अपने 50 मिनट के ऑडियो संदेश में इस्लामी कानूनों के महत्व को रेखांकित किया। इस संदेश को तालिबान के मुख्य प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किया।
अखुंदजादा ने पश्तो में बोलते हुए कहा कि अफगानिस्तान में अब पश्चिमी देशों के कानूनों की कोई जरूरत नहीं है और तालिबान अपने खुद के कानून बनाएगा। उनका यह बयान देश के अंदर और बाहर हलचल मचाने वाला है, खासकर तब जब तालिबान ने महिलाओं और लड़कियों पर कई कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं। महिलाओं को शिक्षा, रोजगार और सार्वजनिक स्थानों पर जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है, जिसके कारण तालिबान को अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तीव्र आलोचना का सामना करना पड़ा है।
तालिबान के सत्ता में आने के बाद से ही अखुंदजादा ने अपने कड़े इस्लामी कानूनों के तहत अफगानिस्तान में शासन की बागडोर संभाली है, हालांकि कुछ अधिकारी यह दावा करते हैं कि यहां समानता और उदारता से शासन किया जाएगा। वहीं, अंतरराष्ट्रीय मंच पर तालिबान की नीतियों के कारण उसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाए गए हैं।
अखुंदजादा ने पश्चिमी देशों की आलोचना करते हुए कहा कि गैर-मुस्लिम देशों का गठबंधन मुसलमानों के खिलाफ एकजुट हो चुका है, और इस्लाम के प्रति इन देशों की राय में बदलाव आ रहा है। उन्होंने गाजा में इज़राइल-हमास संघर्ष का भी जिक्र किया और तालिबान के इस्लामी शासन को मजबूती से बनाए रखने की बात की।
तालिबान द्वारा शरिया लागू किए जाने और लोकतंत्र का खात्मा करने का यह बयान उस समय आया है जब कुछ अंतरराष्ट्रीय समुदायों और अफगानिस्तान के भीतर कुछ प्रमुख लोग तालिबान के कठोर फैसलों के खिलाफ हैं और अधिक लोकतांत्रिक तरीके से शासन की मांग कर रहे हैं। इसके बावजूद, तालिबान के शासन में सत्ता का केंद्रीकरण और इस्लामी कानूनों का लागू होना जारी है, जिससे अफगानिस्तान में बदलाव की राह और भी कठिन हो गई है।
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