April 21, 2026

तहव्वुर राणा का नया दांव: भारत प्रत्यर्पण पर रोक लगाने की अर्जी अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में पेश!

मुंबई में हुए आतंकी हमले के प्रमुख आरोपी तहव्वुर राणा ने अपने प्रत्यर्पण को लेकर एक और जटिल मोड़ लिया है। अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट में भारत के प्रत्यर्पण पर रोक लगाने के लिए तहव्वुर राणा की ओर से दायर की गई नवीनतम याचिका ने एक बार फिर से सबको चौंका दिया है।

राणा, जो फिलहाल लॉस एंजिल्स के मेट्रोपॉलिटन डिटेंशन सेंटर में बंद हैं, पहले ही इस मुद्दे पर कोर्ट में कई बार दलीलें पेश कर चुके थे। लेकिन अब उन्होंने 6 मार्च को मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स के समक्ष एक नई अर्जी पेश की है, जिसके बाद इस मामले की कानूनी पेचिदगी और बढ़ गई है। राणा के वकीलों की ओर से यह अर्जी गुरुवार को दाखिल की गई, जिसमें यह अनुरोध किया गया कि उनकी याचिका पर तत्काल सुनवाई की जाए।

पिछले महीने 27 फरवरी को, राणा ने अमेरिका की शीर्ष अदालत के एसोसिएट जस्टिस और नौवें सर्किट की सर्किट जस्टिस एलेना कागन के समक्ष एक आपातकालीन याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने भारत को प्रत्यर्पित किए जाने पर रोक लगाने की मांग की थी। हालांकि, इस याचिका को अस्वीकार कर दिया गया था। अब राणा ने अपनी याचिका को नवीनीकरण कर, सीधे मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स के समक्ष प्रस्तुत किया है, जो इस मुद्दे पर अंतिम निर्णय लेंगे।

राणा ने अपनी दलील में यह कहा कि अगर उसे भारत प्रत्यर्पित किया जाता है, तो उसे यातनाओं का सामना करना पड़ सकता है। उसका कहना था कि यह संयुक्त राष्ट्र के यातना विरोधी कन्वेंशन का उल्लंघन होगा, क्योंकि भारत में उसके साथ अमानवीय बर्ताव हो सकता है। राणा के वकीलों का यह भी कहना है कि उसकी गंभीर चिकित्सा स्थिति को देखते हुए उसे भारतीय हिरासत केंद्रों में भेजना उसकी मौत की सजा के समान होगा।

यह मामला और भी संवेदनशील हो गया है क्योंकि राणा पाकिस्तानी मूल का मुस्लिम है, और उसे मुंबई हमले के सिलसिले में आतंकवाद से जुड़े गंभीर आरोपों का सामना करना पड़ रहा है। राणा का तर्क है कि उसे भारत भेजने से पहले, इस बात की पूरी जांच की जानी चाहिए कि वहां उसकी सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर खतरे हो सकते हैं।

पिछले साल जनवरी में, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राणा की याचिका को खारिज करते हुए उसके प्रत्यर्पण को मंजूरी दी थी। इसके बावजूद, राणा और उसके वकील अब भी अदालतों का दरवाजा खटखटाते हुए, इस प्रक्रिया को धीमा करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।

इस मामले में अगले कदम क्या होंगे, यह अब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के हाथों में है। क्या राणा की याचिका एक बार फिर खारिज होगी, या यह मामला और भी पेचिदा हो जाएगा? समय के साथ इस मामले का पटाक्षेप देखने लायक होगा।

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