सुप्रीम कोर्ट ने सुपरटेक की 16 परियोजनाओं पर एनसीएलएटी के आदेश पर रोक लगाई: क्या होगा इन कर्ज में डूबी परियोजनाओं का भविष्य?
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में कर्ज में डूबी रियल्टी कंपनी सुपरटेक लिमिटेड की 16 आवासीय परियोजनाओं को पूरा करने के लिए राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) द्वारा दिए गए आदेश पर रोक लगा दी है। इस फैसले से सुपरटेक लिमिटेड की परियोजनाओं के भविष्य को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है, क्योंकि अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा की गई सुनवाई के बाद ही इन परियोजनाओं को लेकर कोई और कदम उठाए जाएंगे।
एनसीएलएटी का विवादास्पद आदेश और सुप्रीम कोर्ट की रोक
एनसीएलएटी ने पिछले दिनों अपने आदेश में सुपरटेक लिमिटेड की लगभग 9,500 करोड़ रुपए की लागत वाली 16 आवासीय परियोजनाओं को पूरा करने की जिम्मेदारी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी एनबीसीसी को सौंप दी थी। इसके साथ ही एनबीसीसी को परियोजना प्रबंधन सलाहकार के रूप में नियुक्त किया गया था। एनसीएलएटी का यह आदेश सुपरटेक लिमिटेड के लिए एक बड़ा झटका था, क्योंकि इसके तहत एनबीसीसी को बिना किसी मंजूरी के सुपरटेक की परियोजनाओं को अपने हाथ में लेने का अधिकार मिल गया था।
इस आदेश के खिलाफ सुपरटेक लिमिटेड ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। सुप्रीम कोर्ट ने एनसीएलएटी के आदेश पर रोक लगाते हुए संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया और इस मामले पर और अधिक जांच करने की बात कही। अदालत ने यह भी कहा कि वह यह जांच करेगी कि क्या एनसीएलएटी ने दिवाला और ऋण राहत अक्षमता संहिता की प्रक्रिया का पालन करते हुए एनबीसीसी को परियोजनाओं की जिम्मेदारी दी थी।
एनसीएलएटी के आदेश पर क्या था विवाद?
एनसीएलएटी ने 12 दिसंबर, 2024 को एनबीसीसी को उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा और कर्नाटक में 49,748 घरों वाली 16 परियोजनाओं को पूरा करने की जिम्मेदारी दी थी। इन परियोजनाओं में लगभग 27,000 खरीदारों को अपना घर मिलने का इंतजार है। एनसीएलएटी ने एनबीसीसी को यह निर्देश भी दिया था कि वह 31 मार्च, 2025 तक काम सौंपने की प्रक्रिया शुरू करें और एक महीने के भीतर संबंधित परियोजनाओं के लिए कॉन्ट्रैक्ट दे दें, ताकि निर्माण 1 मई, 2025 से शुरू किया जा सके।
इस आदेश के अनुसार, प्रत्येक परियोजना के लिए एक कोर्ट कमेटी बनाई जानी थी और साथ ही परियोजना-वार कोर्ट कमेटी में एनबीसीसी को एक सदस्य को नॉमिनेट करने के लिए कहा गया था। इस आदेश से सुपरटेक की परियोजनाओं के बारे में कई सवाल उठे थे, क्योंकि कंपनी का मानना था कि एनबीसीसी को बिना किसी स्वीकृति के परियोजनाओं का जिम्मा देना अन्य पक्षों के हितों को नजरअंदाज करना था।
सुपरटेक का बयान: कोर्ट के फैसले का किया स्वागत
सुपरटेक समूह के चेयरमैन आरके अरोड़ा ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि वह एनसीएलएटी के आदेश पर रोक लगाने के फैसले का सम्मान करते हैं। अरोड़ा ने यह भी कहा कि एनबीसीसी को बिना भूमि प्राधिकरणों और ऋणदाताओं जैसे अन्य पक्षों के हितों का सम्मान किए बिना सुपरटेक की परियोजनाओं को अपने हाथ में लेने की अनुमति दी गई थी, जो कि अनुचित था। उन्होंने कहा कि सुपरटेक के प्रवर्तक के तौर पर उनका उद्देश्य घर खरीदने वालों, बैंकरों और भूमि प्राधिकरणों सहित सभी हितधारकों के लिए समाधान निकालना है।
क्या होगा इन परियोजनाओं का भविष्य?
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला सुपरटेक और उसके खरीदारों के लिए एक बड़ी उम्मीद लेकर आया है। हालांकि, इस फैसले से यह भी स्पष्ट हो गया है कि इस मामले की सुनवाई अब और गहरे स्तर पर की जाएगी, जिससे आने वाले समय में इन 16 परियोजनाओं के भविष्य को लेकर और अधिक स्पष्टता मिलेगी। अब यह देखना होगा कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर अपने अगले फैसले में क्या दिशा निर्धारित करता है और क्या सुपरटेक अपनी परियोजनाओं को फिर से पटरी पर लाने में सफल हो पाता है।
यह मामला न केवल सुपरटेक लिमिटेड के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि उन हजारों घर खरीदारों के लिए भी अहम है जो वर्षों से अपने घर का इंतजार कर रहे हैं। इन परियोजनाओं के पूरा होने से ही उन खरीदारों को अपने घर मिल सकेंगे, जो अब तक अनिश्चितता के बीच हैं। अब सुप्रीम कोर्ट के अगले आदेश पर सभी की नजरें टिकी हैं।
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