प्यार, धोका, साजिश,… हत्या..?
राजधानी लखनऊ की शांत फिजा को उस समय गहरी खामोशी ने घेर लिया जब एक फार्मेसी व हॉस्पिटल संचालक विनय मिश्रा की लाश इंदिरा नहर से बरामद की गई। विनय मिश्रा लाइफलाइन फार्मेसी एवं हॉस्पिटल” नाम से गोमतीनगर, कठौता चौराहे के पास एक निजी अस्पताल संचालित करते थे। 25 जून को वह अपनी वैगनआर कार लेकर निकले थे। दोस्तो को लगा था कि कुछ ही देर में लौट आएंगे, लेकिन रात तक कोई खबर न मिलने के बाद चिंता गहराने लगी। अगले दिन, उनका शव नहर में मिलने की खबर से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई।
विनय का परिवार लखनऊ में नहीं बल्कि दिल्ली में रहता है, और यहां उनका किसी से ज्यादा संपर्क नहीं था। ऐसे में उनके गुम हो जाने और फिर लाश मिलने के बीच का खाली समय कई गहरे सवाल छोड़ गया है।
इस केस को सिर्फ आत्महत्या मानना बहुत जल्दबाजी होगी, क्योंकि इसके पीछे एक ऐसा जाल सामने आया है, जो महज निजी रिश्तों तक सीमित नहीं, बल्कि बड़े आर्थिक और मानसिक शोषण से जुड़ा है। विनय मिश्रा पिछले 6 वर्षों से एक महिला—लक्ष्मी—के साथ प्रेम संबंध में थे। बताया गया कि लक्ष्मी नेपाल की रहने वाली थी और इसी दौरान उसने एक अन्य व्यक्ति—खुराना नाम के शख्स—से प्रेम संबंध में अगयी । यह सब विनय की जानकारी के बाहर हो रहा था।
जांच में यह भी सामने आया है कि लक्ष्मी ने विनय से प्रेम संबंधों के बहाने करीब 8 करोड़ रुपये अलग-अलग तरीकों से लिए थे। यह रकम किसी छोटे मोटे धोखे की कहानी नहीं है। विनय को यह तक पता चला कि उनके पास जो गाड़ी थी, वो लक्ष्मी ने अपने प्रेमी युवक के नाम पर खरीद कर उन्हें गिफ्ट की थी। आत्महत्या से एक दिन पहले वह महिला खुद लखनऊ आई, विनय से गाड़ी लेकर गई और कथित रूप से उनके साथ मारपीट भी की।
अगले ही दिन, विनय मिश्रा का शव इंदिरा नहर में बहता हुआ मिला।
ये पूरी कहानी एक ऐसी पटकथा जैसी लगती है, जिसमें प्यार, लालच, धोखा, धमकी और अंत में मौत शामिल है। सवाल ये नहीं कि विनय ने आत्महत्या की या नहीं—सवाल यह है कि क्या वह इस हनी ट्रैप की गहराई में डूब चुके थे.. और जब कोई रास्ता नहीं बचा तो खुद को खत्म कर लिया? या फिर यह किसी सोची-समझी साजिश का हिस्सा था.. जिसमें उन्हें पूरी प्लानिंग से रास्ते से हटाया गया?
इस मामले में लक्ष्मी फिलहाल लापता है। कोई जानकारी नहीं, कोई लोकेशन नहीं। न ही पुलिस के हाथ कोई पुख्ता डिजिटल क्लू मिला है और न ही कोई गवाह सामने अभी तक आया है।
अब ये जांच एजेंसियों और कानून-व्यवस्था के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनकर खड़ा है।
तो क्या विनय मिश्रा की मौत को महज आत्महत्या मान लेना एक बड़ी भूल होगी?
क्या 8 करोड़ रुपये की ठगी और रिश्तों के छल ने उन्हें टूटने पर मजबूर किया या ये पूरी एक साजिश थी?
कहां है लक्ष्मी? क्यों है वो गायब?
क्या सिस्टम अब भी चुप रहेगा या इस ‘हनी ट्रैप नेटवर्क’ की परतें खोली जाएंगी?
आख़िर कब तक ऐसे जाल में फंसकर मासूम लोग दम तोड़ते रहेंगे और सिस्टम तमाशबीन बना रहेगा?
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