एक लाख के इनामी डकैत का बाराबंकी में खौफनाक अंत – STF एनकाउंटर में ढेर, जानिए उसकी पूरी अपराध कथा
बाराबंकी के रामनगर क्षेत्र की रात खामोश नहीं थी – वहां गोलियों की आवाज़ गूंज रही थी, और उस अंधेरे में एक लंबे समय से फरार कुख्यात अपराधी का अंत लिखा जा रहा था। उत्तर प्रदेश STF ने आखिरकार एक बेहद वांछित और खतरनाक अपराधी को ढेर कर दिया। नाम था – ज्ञानचंद्र पासी, एक लाख का इनामी, 70 से ज़्यादा संगीन आपराधिक मामलों में वांछित, और यूपी पुलिस के लिए सिरदर्द बना हुआ नाम।
कौन था ज्ञानचंद्र पासी?
ज्ञानचंद कोई मामूली बदमाश नहीं था। उसके खिलाफ हत्या, डकैती, लूट, अवैध हथियार रखने जैसे कुल 70 से अधिक आपराधिक केस दर्ज थे। वह एक ऐसा अपराधी था, जो कानून की पकड़ से लगातार बचता रहा, लेकिन उसका खौफ यूपी के कई जिलों में पसरा हुआ था। पुलिस रिकॉर्ड बताते हैं कि 24/25 अप्रैल 2025 की रात उसने एक घर में डकैती के इरादे से घुसकर एक युवक को गोली मार दी थी, जब उसने विरोध किया। यह घटना उसकी तलाश को और तेज कर गई थी।
कैसे हुआ एनकाउंटर?
STF को इनपुट मिला कि ज्ञानचंद्र पासी बाराबंकी के रामनगर थाना क्षेत्र में छिपा हुआ है। इसके बाद STF की टीम ने इलाके में घेराबंदी की। जैसे ही बदमाश को चारों ओर से घेरने की कोशिश की गई, उसने जवाब में गोलियां बरसानी शुरू कर दीं। पुलिस ने भी मोर्चा संभाला और जवाबी फायरिंग में वह मौके पर ही मारा गया।
क्या-क्या मिला बदमाश के पास से?
एनकाउंटर स्थल से STF को भारी मात्रा में हथियार बरामद हुए। इनमें एक अवैध .32 बोर पिस्टल, एक राइफल, 315 बोर और 12 बोर की बंदूकें शामिल हैं। इसके अलावा कई कारतूस भी बरामद किए गए हैं। यह सारी बरामदगी इस बात का प्रमाण है कि पासी एक संगठित अपराधी गिरोह का हिस्सा था, जो भविष्य में किसी बड़ी वारदात की तैयारी कर सकता था।
STF की सफलता और आगे की कार्रवाई
इस एनकाउंटर को STF की एक बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि ज्ञानचंद्र पासी लंबे समय से कानून की आंखों में धूल झोंकता आ रहा था। उसकी गिरफ्तारी या ढेर किया जाना पुलिस के लिए किसी चुनौती से कम नहीं था। अब STF उस गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुट गई है, जिससे पासी जुड़ा हुआ था।
उत्तर प्रदेश में अपराध के खिलाफ एक और कड़ी कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि अब अपराधियों के लिए भागने की जगह नहीं बची। ज्ञानचंद्र पासी का अंत एक संदेश है – कानून की नजर से बचना मुमकिन नहीं, चाहे वक्त कितना भी लग जाए। STF की यह कार्रवाई न केवल एक कुख्यात अपराधी के खात्मे की कहानी है, बल्कि एक पूरे अपराध तंत्र के दरकने की शुरुआत भी मानी जा रही है।
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