भारत में SIR के बाद 9 राज्यों में 1.70 करोड़ वोटर कम, गुजरात में सबसे ज्यादा नाम हटे
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के बाद देश के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची में बड़ा बदलाव सामने आया है। जारी आंकड़ों के मुताबिक, इनमें से 9 राज्यों में अंतिम वोटर रोल में कुल 1.70 करोड़ मतदाताओं के नाम कम हो गए हैं, जो कुल संख्या का लगभग 7.993 प्रतिशत है। बड़े राज्यों की बात करें तो गुजरात में सबसे अधिक 13.4 प्रतिशत वोटरों के नाम हटाए गए, जबकि केरल में सबसे कम 3.22 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, SIR की शुरुआत के समय अंडमान और निकोबार, लक्षद्वीप, पुडुचेरी, छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, केरल, मध्य प्रदेश और राजस्थान समेत कई राज्यों में कुल मतदाताओं की संख्या 21.45 करोड़ से अधिक थी, जो संशोधित सूची जारी होने के बाद घटकर करीब 19.75 करोड़ रह गई। इस तरह कुल 1,70,28,514 मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। वहीं जम्मू और कश्मीर में अप्रैल से मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण शुरू किया जाना है।
अगर बिहार के आंकड़ों को भी शामिल किया जाए, जहां विधानसभा चुनाव से पहले SIR प्रक्रिया लागू की गई थी, तो हटाए गए मतदाताओं की कुल संख्या 2.16 करोड़ तक पहुंच जाती है। बिहार में जून 2024 में मतदाताओं की संख्या 7.89 करोड़ थी, जो सितंबर 2024 में घटकर 7.43 करोड़ रह गई थी। अधिकारियों के अनुसार, इस प्रक्रिया के तहत नए मतदाताओं को पंजीकरण का मौका दिया गया था, वहीं ड्राफ्ट रोल में नाम होने के बावजूद कई लोग आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके, जिसके कारण उनके नाम हटाए गए।
राज्यों के अनुसार आंकड़ों पर नजर डालें तो गुजरात में मतदाताओं की संख्या 5.08 करोड़ से घटकर 4.40 करोड़ हो गई, जो सबसे बड़ा बदलाव माना जा रहा है। मध्य प्रदेश में 34.35 लाख मतदाताओं के नाम कम हुए, हालांकि प्रतिशत के लिहाज से यह कमी 5.96 प्रतिशत रही। राजस्थान में मतदाताओं की संख्या 5.46 करोड़ से घटकर 5.15 करोड़ हो गई, जिससे 31.36 लाख नाम सूची से हटे। वहीं छत्तीसगढ़ में 24.99 लाख मतदाताओं की कमी दर्ज की गई, जो 11.77 प्रतिशत की बड़ी गिरावट मानी जा रही है।
इस बीच जिन राज्यों में संशोधित मतदाता सूची अभी जारी नहीं हुई है, उनमें उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु शामिल हैं। जानकारी के अनुसार तमिलनाडु की सूची जल्द जारी की जाएगी, जबकि पश्चिम बंगाल की सूची का कुछ हिस्सा फरवरी के अंत तक और बाकी न्यायिक जांच के बाद जारी होगा। उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची 6 अप्रैल को जारी होने की संभावना है। अधिकारियों का कहना है कि मतदाता सूची को अधिक पारदर्शी और सटीक बनाने के लिए यह प्रक्रिया नियमित रूप से की जाती है, ताकि पात्र मतदाताओं का सही रिकॉर्ड सुनिश्चित किया जा सके।
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