शिबू सोरेन के लिए भारत रत्न की मांग, झारखंड के मंत्री ने बताया क्यों हैं हकदार
झारखंड के दिग्गज नेता और झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक शिबू सोरेन का 4 अगस्त 2025 को निधन हो गया। उनके निधन के बाद झारखंड के मंत्री इरफान अंसारी ने शिबू सोरेन को भारत रत्न से सम्मानित करने की मांग की है। मंत्री ने कहा कि शिबू सोरेन ‘दिशोम गुरु’ के नाम से जाने जाते थे और वे गरीबों और आदिवासियों के सच्चे आवाज़ थे। इरफान अंसारी ने राष्ट्रपति से आग्रह किया है कि शीघ्र ही उन्हें भारत रत्न दिया जाना चाहिए क्योंकि वे इसके पूरी तरह हकदार हैं।
शिबू सोरेन लंबे समय से बीमार थे और 19 जून से दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में भर्ती थे। उनके स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए कई डॉक्टर्स प्रयासरत थे, लेकिन 81 वर्ष की उम्र में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन से झारखंड सहित पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है। मंत्री इरफान अंसारी ने कहा कि उनकी कमी पूरी नहीं हो पाएगी और उनका जाना झारखंड के लिए अपूरणीय क्षति है।
इरफान अंसारी ने शिबू सोरेन को ‘क्रांतिकारी’ बताते हुए कहा कि वे गरीबों और आदिवासियों के अधिकारों के लिए लगातार संघर्ष करते रहे। उन्होंने कहा, “वे जमीन से जुड़े आंदोलनकारी थे और हमेशा गरीबों की आवाज बने। इसलिए भारत सरकार को उन्हें भारत रत्न पुरस्कार से सम्मानित करना चाहिए।” मंत्री ने जोर देकर कहा कि ऐसे नेताओं को सम्मानित करना ज़रूरी है जिन्होंने जनसमाज के लिए अपना जीवन समर्पित किया हो।
शिबू सोरेन झारखंड के तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके थे और आदिवासियों के अधिकारों के लिए उनकी लड़ाई ने उन्हें ‘दिशोम गुरु’ का सम्मान दिलाया। उन्होंने झारखंड राज्य के गठन में अहम भूमिका निभाई और झारखंड मुक्ति मोर्चा की स्थापना की। उनकी नेतृत्व क्षमता और सामाजिक कार्यों की वजह से वे आज भी आदिवासी समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत माने जाते हैं। फिलहाल उनकी पार्टी का नेतृत्व उनके पुत्र और वर्तमान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन कर रहे हैं।
शिबू सोरेन का जाना झारखंड की राजनीति और आदिवासी आंदोलन के लिए एक युग के अंत जैसा है। उनके योगदान को याद करते हुए कई नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की है। भारत रत्न जैसी उच्चतम नागरिक सम्मान से सम्मानित करने की मांग उनकी विरासत को सुरक्षित रखने और उनके संघर्ष को सम्मान देने का भी प्रयास है।
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