एक ही एक्टर के साथ 130 फिल्में, ‘चंद्रमुखी’ की एक्ट्रेस शीला ने बनाया इतिहास, 17 की उम्र में रखा था फिल्मी दुनिया में कदम!
भारतीय सिनेमा में कई अभिनेत्रियाँ आईं और गईं, लेकिन कुछ ऐसी भी रहीं जिन्होंने सिर्फ अभिनय से नहीं, बल्कि रिकॉर्ड बनाकर अपना नाम अमर कर लिया। ऐसी ही एक चमकता नाम है — शीला, मलयालम सिनेमा की दिग्गज अभिनेत्री, जिन्होंने न सिर्फ पर्दे पर जादू बिखेरा बल्कि अपने अभिनय करियर में ऐसा कीर्तिमान बनाया, जो आज भी मिसाल है।
13 की उम्र में थिएटर, 17 की उम्र में फिल्मों में एंट्री
शीला ने बहुत ही कम उम्र में अपने सपनों की उड़ान भर दी थी। महज 13 साल की उम्र में उन्होंने थिएटर से नाता जोड़ लिया और 17 की उम्र में फिल्मों में कदम रखा। साल 1962 में रिलीज़ हुई तमिल फिल्म ‘पासम’ (Paasam) से उन्होंने अपने करियर की शुरुआत की। फिल्म इंडस्ट्री में शुरुआत में उन्होंने अपना नाम ‘शीला देवी’ रखा था, जिसे बाद में संक्षिप्त करके सिर्फ ‘शीला’ कर लिया।
130 फिल्मों का ऐतिहासिक रिकॉर्ड – एक ही एक्टर के साथ!
शीला का नाम सबसे ज़्यादा चर्चा में तब आया जब उन्होंने मलयालम फिल्म इंडस्ट्री के सुपरस्टार प्रेम नजीर के साथ 130 से ज्यादा फिल्मों में काम करके एक रिकॉर्ड कायम कर दिया। यह एक्टर-अभिनेत्री की जोड़ी के रूप में अब तक का सबसे ज्यादा फिल्मों में साथ काम करने वाला रिकॉर्ड है, जो गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज हो चुका है।
‘चंद्रमुखी’ में भी आई थीं नज़र
हालांकि शीला मुख्य रूप से मलयालम फिल्मों में सक्रिय रहीं, लेकिन उन्होंने तमिल, तेलुगु और हिंदी सिनेमा में भी अपनी पहचान बनाई। उन्हें तमिल फिल्म ‘चंद्रमुखी’ (2005) में एक महत्वपूर्ण किरदार में भी देखा गया था, जिसमें रजनीकांत मुख्य भूमिका में थे। इस फिल्म के ज़रिए नई पीढ़ी के दर्शकों ने भी शीला को बड़े पर्दे पर देखा और सराहा।
अभिनेत्री से डायरेक्टर बनीं, और जीता नेशनल अवॉर्ड
शीला सिर्फ एक सफल अभिनेत्री नहीं रहीं, बल्कि उन्होंने निर्देशन में भी हाथ आजमाया और एक डायरेक्टर के रूप में भी अपनी पहचान बनाई। उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार (National Award) से भी नवाज़ा गया।
निष्कर्ष: शीला की कहानी उस जुनून और समर्पण की मिसाल है, जो किसी कलाकार को लीजेंड बना देता है। कम उम्र में शुरुआत, लगातार मेहनत, और फिर एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड—शीला आज भी इंडियन सिनेमा की उन शख्सियतों में गिनी जाती हैं, जिनके बिना इतिहास अधूरा है।
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