तीन महीने में निवेशकों ने कमाए 72 लाख करोड़, लेकिन बाजार की रफ्तार पर एक्सपर्ट्स ने उठाए सवाल
भारतीय शेयर बाजार ने बीते तीन महीनों में जबरदस्त उछाल दर्ज की है। सेंसेक्स ने लगभग 12,000 अंकों की छलांग लगाई है और BSE में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप 72 लाख करोड़ रुपये बढ़कर 461 लाख करोड़ तक पहुंच गया है। इस ऐतिहासिक तेजी से निवेशकों की संपत्ति में बंपर इजाफा तो हुआ है, लेकिन विशेषज्ञों ने अब बाजार के ओवरवैल्यूएशन को लेकर गंभीर चेतावनी दी है।
लिक्विडिटी के दम पर बाजार में बूम
विशेषज्ञों का कहना है कि यह तेजी बाजार की मूल आर्थिक स्थिति या कंपनियों की कमाई से नहीं, बल्कि लिक्विडिटी यानी अधिक पूंजी प्रवाह के कारण आई है। डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (DIIs) ने इस दौरान 3.5 लाख करोड़ रुपये झोंके, वहीं फॉरेन इनवेस्टर्स (FIIs) भी लगातार तीन महीनों से बाजार में खरीदारी कर रहे हैं। म्यूचुअल फंड्स के पास भी मई 2025 तक 2.17 लाख करोड़ रुपये की नगदी थी, और हर महीने SIP के जरिए 26,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की आवक हो रही है।
क्या अब बाजार क्षमता से ऊपर पहुंच चुका है?
हालांकि इस लिक्विडिटी बूम ने वैल्यूएशन और कंपनियों के फंडामेंटल्स के बीच गहरा अंतर पैदा कर दिया है। कोटक AMC के मैनेजिंग डायरेक्टर नीलेश शाह का कहना है कि “अब बाजार या तो फेयरली वैल्यूड है या थोड़ा ओवरवैल्यूड।” उन्होंने चेतावनी दी कि पिछले पांच सालों जैसे रिटर्न अब दोहराए जाने की संभावना कम है, और आगे का मुनाफा अब कंपनियों की वास्तविक कमाई पर निर्भर करेगा।
कहां करें निवेश, क्या रखें सावधानी?
विशेषज्ञ सलाह दे रहे हैं कि निवेशक अपने पोर्टफोलियो को डायवर्सिफाई करें और केवल इक्विटी में भरोसा न रखें। REITs, InvITs, डेट म्यूचुअल फंड्स, गोल्ड और ETFs जैसे विकल्पों पर भी ध्यान दें।
RBI द्वारा ब्याज दरों में कटौती और CRR में छूट से फाइनेंशियल सेक्टर को सबसे अधिक लाभ मिला है। बैंकिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस कंपनियों जैसे PFC और REC अच्छे निवेश विकल्प बन सकते हैं। वहीं, PSU बैंक इंडेक्स भी छह महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच चुका है।
IT और केमिकल सेक्टर भी रडार पर
टेक्नोलॉजी स्टॉक्स, जो अब तक पीछे रहे हैं, अब कम वैल्यूएशन और बेहतर डिविडेंड यील्ड के चलते आकर्षक दिख रहे हैं। कोटक म्यूचुअल फंड के अतुल भोले का कहना है कि IT सेक्टर में बड़े स्टॉक्स 2-2.5% डिविडेंड यील्ड दे रहे हैं और अगर बिजनेस साइकिल सामान्य रहा तो इनकी डिमांड बढ़ सकती है। वहीं केमिकल सेक्टर में भी दो साल की गिरावट के बाद स्थिरता और रिकवरी के संकेत मिल रहे हैं।
अमेरिका टैरिफ नीति और Q1 रिजल्ट्स पर नजर
विशेषज्ञों का मानना है कि 9 जुलाई को अमेरिका की टैरिफ नीति की डेडलाइन और पहली तिमाही के नतीजे (Q1 Earnings) बाजार की अगली दिशा तय कर सकते हैं। खासकर फार्मा और केमिकल सेक्टर, जो निर्यात पर निर्भर हैं, उनमें अतिरिक्त सतर्कता की जरूरत है।
निष्कर्ष
हालांकि बाजार की मौजूदा रफ्तार ने निवेशकों को जबरदस्त लाभ पहुंचाया है, लेकिन ओवरवैल्यूएशन और वैश्विक अनिश्चितताओं को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। ऐसे में स्मार्ट इनवेस्टर्स के लिए यह समय मुनाफा सुरक्षित करने और पोर्टफोलियो में संतुलन लाने का हो सकता है।
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