शाहजहांपुर के जमालपुर स्कूल में एक अनोखी पहल: हेडमास्टर की पत्नी ने बचत से कर दिया दफ्तर को रेनोवेट, शिक्षा व्यवस्था में बदलाव की नई मिसाल
उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले के जमालपुर प्राइमरी स्कूल में एक अनोखी पहल देखने को मिली है, जहां हेडमास्टर अभिषेक दीक्षित की पत्नी शिखा ने अपनी बचत से उनके दफ्तर को नया रूप दे दिया है। शिखा का मानना है कि बेहतर और आकर्षक माहौल में काम करने से न केवल उनके पति को मानसिक शांति मिलेगी, बल्कि इससे स्कूल के बच्चों पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा। शिखा ने अपने पति के दफ्तर को ऐसा कॉरपोरेट लुक दिया कि यह अब किसी भी बड़े दफ्तर से कम नहीं लगता। इस बदलाव ने स्कूल के माहौल को पूरी तरह से बदल दिया है और अब यह पूरी तरह से चर्चा का विषय बन चुका है।
अभिषेक दीक्षित शाहजहांपुर के सदर बाजार इलाके में रहते हैं और साल 2016 से जमालपुर प्राइमरी स्कूल में हेडमास्टर के तौर पर कार्यरत हैं। 2023 में उनकी पत्नी शिखा ने स्कूल का दौरा किया, जहां उन्होंने देखा कि स्कूल में ठंडे पानी की व्यवस्था नहीं थी, जो बच्चों के लिए बहुत जरूरी था। शिखा ने सबसे पहले स्कूल में ठंडे पानी की सुविधा उपलब्ध करवाई। इसके बाद उन्होंने अपने पति के दफ्तर को नया रूप देने का फैसला लिया। शिखा का मानना था कि जब एक अच्छे माहौल में काम किया जाएगा, तो इसका असर न केवल स्कूल के प्रशासन पर, बल्कि बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ेगा।
शिखा ने अपनी बचत से पति के दफ्तर का रेनोवेशन कराया। अब उनका दफ्तर किसी भी कॉरपोरेट ऑफिस से कम नहीं लगता, जो स्कूल के वातावरण को पूरी तरह से बदलने वाला कदम साबित हुआ है। शिखा ने कहा कि स्कूल में सरकारी मानकों के मुताबिक व्यवस्था थी, लेकिन उन्हें लगा कि अपनी बचत का पैसा अच्छे काम में लगाकर उन्हें मानसिक संतोष मिलेगा, और इससे शिक्षा व्यवस्था में एक सकारात्मक बदलाव आ सकेगा।
स्कूल में कुछ समय पहले तक कुर्सियों की कमी थी, लेकिन शिखा की कोशिशों के बाद छात्रों के लिए कुर्सियों की व्यवस्था भी कर दी गई। इस बदलाव को देखकर गांववाले भी खुशी से झूम उठे, क्योंकि उन्होंने अपने बच्चों को अब कुर्सियों पर बैठकर पढ़ते हुए देखा। पहले जो स्कूल ब्लॉक के सबसे कमजोर स्कूलों में माना जाता था, आज वह स्कूल प्रतियोगिताओं में अच्छा प्रदर्शन कर रहा है। इसमें हेडमास्टर अभिषेक दीक्षित और उनके सहयोगी शिक्षक मयंक भूषण पांडे का अहम योगदान है।
इससे यह साबित होता है कि अगर परिवार का साथ और प्रेरणा हो, तो शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव संभव है। शिखा की पहल ने न सिर्फ उनके पति का दफ्तर, बल्कि पूरे स्कूल का माहौल बदल दिया है और यह एक प्रेरणादायक मिसाल है कि छोटी सी पहल भी बड़े बदलाव का कारण बन सकती है।
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