SEBI की चेतावनी के बाद भी नहीं मान रहे लोग, कॉल-पुट के खेल में डूबे 1.75 लाख करोड़ रुपये
भारतीय शेयर बाजार में फ्यूचर और ऑप्शन (F&O) ट्रेडिंग का क्रेज लगातार बढ़ता जा रहा है। बड़ी कमाई के लालच में हजारों रिटेल निवेशक इसमें कूद रहे हैं, लेकिन यह कदम अक्सर उनके लिए घाटे का सौदा साबित होता है। बाजार नियामक सेबी (SEBI) लगातार चेतावनी दे रहा है कि इस तरह की सट्टेबाजी से निवेशक अपनी पूंजी गंवा बैठते हैं। बावजूद इसके निवेशकों का झुकाव ऑप्शन ट्रेडिंग की तरफ बढ़ता जा रहा है और नतीजा यह है कि हाल ही में कॉल-पुट के खेल में 1.75 लाख करोड़ रुपये साफ हो गए।
सेबी ने हाल ही में अपने अभियान को और तेज किया है। बाजार में अनियंत्रित सट्टेबाजी पर रोक लगाने के लिए नियामक ने कई कदम उठाए हैं। इसी कड़ी में जब सेबी ने ऑप्शन और फ्यूचर पर नकेल कसने की कोशिश की, तो बाजार की वैल्यूएशन में भी भारी गिरावट देखी गई। BSE का शेयर अपने ऑल टाइम हाई से लगभग 29% टूटा, जिससे बाजार मूल्य में करीब 35,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। वहीं, NSE के अनलिस्टेड सेक्टर के सबसे बड़े मल्टीबैगर शेयर में 22% की गिरावट दर्ज की गई, जिसके चलते निवेशकों को लगभग 1.4 लाख करोड़ रुपये का झटका लगा।
ये झटका सिर्फ एक्सचेंजों तक ही सीमित नहीं रहा। ब्रोकरेज फर्मों पर भी इसका सीधा असर देखा गया। उदाहरण के तौर पर डिस्काउंट ब्रोकरेज कंपनी एंजेल वन की आय का बड़ा हिस्सा F&O ट्रेड से आता है। बाजार में गिरावट का असर इसके शेयर पर भी साफ नजर आया, जो अपने उच्चतम स्तर से 37% टूट गए। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर वीकली एक्सपायरी को बढ़ाकर 15 दिन कर दिया गया या एक्सपायरी की संख्या घटा दी गई, तो इससे एक्सचेंजों और ब्रोकरेज कंपनियों की कमाई पर और नकारात्मक असर पड़ेगा।
ग्लोबल ब्रोकरेज हाउस जेफरीज की रिपोर्ट भी यही इशारा करती है। रिपोर्ट में कहा गया कि अगर एक्सपायरी में बदलाव लागू किया गया, तो BSE के वित्त वर्ष 2027 के EPS में 20-50% तक की कटौती हो सकती है। नुवामा के लिए भी यह गिरावट 15-25% तक हो सकती है। इससे साफ है कि सेबी की सख्ती का असर आने वाले समय में और गहराई से बाजार पर दिखेगा।
आंकड़े बताते हैं कि F&O ट्रेडिंग में 90% से ज्यादा रिटेल निवेशकों का पैसा डूब जाता है। वित्त वर्ष 2025 में ही 91% व्यक्तिगत व्यापारियों को कुल 1.06 लाख करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। यानी एक औसत निवेशक ने करीब 1.1 लाख रुपये गवां दिए। विशेषज्ञों का मानना है कि सेबी की कोशिशें निवेशकों की सुरक्षा के लिए जरूरी हैं, लेकिन जब तक निवेशक खुद जोखिम को समझकर कदम नहीं उठाते, तब तक ऐसे नुकसान रुकना मुश्किल है। कॉल-पुट के खेल ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि बाजार में बिना समझदारी के की गई एंट्री बड़े घाटे का कारण बन सकती है।v
Share this content:
