महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी मोड़ देखने को मिला है। एनसीपी अजित पवार गुट की वरिष्ठ नेता सुनेत्रा पवार को लेकर चर्चाएं उस वक्त तेज हो गईं, जब उनके नाम पर उपमुख्यमंत्री पद के लिए सहमति बन गई, जबकि इससे पहले शरद पवार से उनकी संभावित मुलाकात की खबरें सामने आ रही थीं। माना जा रहा था कि किसी भी बड़े फैसले से पहले सुनेत्रा पवार शरद पवार से मुलाकात करेंगी, लेकिन उससे पहले ही उनके ‘ताजपोशी’ पर मुहर लगने से सियासी गलियारों में हलचल मच गई है।
सूत्रों के मुताबिक, सुनेत्रा पवार की शरद पवार से मीटिंग तय मानी जा रही थी, जिसमें पार्टी की मौजूदा स्थिति, भविष्य की रणनीति और सत्ता संतुलन पर चर्चा हो सकती थी। लेकिन अचानक घटनाक्रम ने करवट बदली और अजित पवार गुट ने तेजी दिखाते हुए सुनेत्रा पवार के नाम पर अंतिम सहमति बना ली। इस फैसले ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या यह कदम शरद पवार की सहमति के बिना उठाया गया, या फिर जानबूझकर उन्हें साइडलाइन किया गया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह पूरा घटनाक्रम पवार परिवार के भीतर चल रहे सत्ता संघर्ष की एक और कड़ी हो सकता है। पहले ही एनसीपी में दो फाड़ के बाद शरद पवार और अजित पवार के बीच मतभेद खुलकर सामने आ चुके हैं। ऐसे में सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री पद के लिए आगे बढ़ाना, बिना शरद पवार से औपचारिक मुलाकात के, यह संकेत देता है कि अजित पवार गुट अब किसी तरह के राजनीतिक संतुलन या पारिवारिक सहमति की परवाह नहीं कर रहा।
इस फैसले के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या शरद पवार इस घटनाक्रम से नाराज हैं। हालांकि सार्वजनिक तौर पर शरद पवार की ओर से कोई तीखी प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन उनके करीबी नेताओं की चुप्पी और सीमित बयान कई तरह के संकेत दे रहे हैं। माना जा रहा है कि शरद पवार इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं और आने वाले दिनों में अपनी रणनीति का खुलासा कर सकते हैं।
वहीं, अजित पवार गुट इसे पूरी तरह राजनीतिक फैसला बता रहा है। उनका कहना है कि सुनेत्रा पवार का अनुभव, संगठन में पकड़ और प्रशासनिक समझ उन्हें इस पद के लिए उपयुक्त बनाती है। गुट के नेताओं के मुताबिक, राज्य की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में तेजी से फैसले लेना जरूरी था, और इसी वजह से किसी भी तरह की देरी नहीं की गई।
कुल मिलाकर, सुनेत्रा पवार की ‘ताजपोशी’ ने महाराष्ट्र की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। एक तरफ सत्ता में मजबूती दिखाने की कोशिश है, तो दूसरी ओर पवार परिवार के भीतर रिश्तों और राजनीतिक संतुलन पर सवाल खड़े हो रहे हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि शरद पवार इस पूरे घटनाक्रम पर क्या रुख अपनाते हैं और क्या एनसीपी की अंदरूनी खाई और गहरी होती है या फिर कोई नया सियासी समीकरण सामने आता है।
Share this content: