April 19, 2026

सपनों का घर अब सस्ता नहीं! तैयार मकानों को पीछे छोड़ निर्माणाधीन प्रॉपर्टी क्यों बन गई महंगी डील?

हर किसी का सपना होता है – एक अपना घर। लेकिन अब उस सपने तक पहुंचना पहले जितना आसान नहीं रह गया है। रियल एस्टेट सेक्टर में ऐसा ट्रेंड सामने आया है जो वर्षों की समझ को पलट रहा है। अब रेडी-टू-मूव यानी तैयार घरों की तुलना में अंडर कंस्ट्रक्शन यानी निर्माणाधीन मकान कहीं ज्यादा महंगे हो गए हैं।

मैजिकब्रिक्स की रिपोर्ट ने किया खुलासा
भारत के प्रमुख रियल एस्टेट प्लेटफॉर्म मैजिकब्रिक्स की ताजा रिपोर्ट में चौंकाने वाला डेटा सामने आया है। देश के प्रमुख शहरों में निर्माणाधीन मकानों की कीमतें अब तैयार घरों से ज्यादा हो चुकी हैं – एक ट्रेंड जो अब तक उलटा ही देखा गया था।

दिल्ली से मुंबई तक पलटी तस्वीर
राजधानी दिल्ली की बात करें तो यहां रेडी-टू-मूव अपार्टमेंट्स की औसत कीमत जहां 18,698 रुपये प्रति वर्ग फुट है, वहीं अंडर कंस्ट्रक्शन घरों की कीमत 25,921 रुपये प्रति वर्ग फुट तक पहुंच चुकी है। यही नहीं, गुरुग्राम में भी यही ट्रेंड दोहराया जा रहा है – यहां निर्माणाधीन मकानों की औसत कीमत 17,185 रुपये प्रति वर्ग फुट है, जबकि तैयार घरों की 14,617 रुपये प्रति वर्ग फुट।

अगर बात करें भारत के सबसे महंगे हाउसिंग मार्केट मुंबई की, तो वहां भी आंकड़े और चौंकाने वाले हैं। निर्माणाधीन प्रॉपर्टी की कीमतें 2025 की पहली तिमाही में सालाना आधार पर 33.4% बढ़कर 32,371 रुपये प्रति वर्ग फुट हो गई हैं, जबकि रेडी-टू-मूव मकानों की कीमतें 28,935 रुपये प्रति वर्ग फुट पर ही अटकी हैं।

आखिर ऐसा क्यों हो रहा है?
इस कीमतों की इस उलटी चाल के पीछे दो मुख्य कारण बताए जा रहे हैं।

1. बदलते डिज़ाइन और उपभोक्ता की सोच:
आज के होमबायर्स केवल चार दीवारों वाला घर नहीं चाहते, वे आधुनिक डिज़ाइन, स्मार्ट स्पेस प्लानिंग, हाई-क्वालिटी फिटिंग्स और बेहतर लेआउट के लिए प्रीमियम देने को तैयार हैं। नई परियोजनाएं इन अपेक्षाओं को ध्यान में रखते हुए विकसित की जा रही हैं।

2. महामारी के बाद का माइंडसेट और लागत में उछाल:
कोविड-19 महामारी के बाद लोगों में घर खरीदने की भावना और भी मजबूत हुई है। साथ ही कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी और निर्माण लागत में आए उछाल ने अंडर कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स को महंगा बना दिया है।

निवेशकों के लिए क्या है मायने?
इस ट्रेंड का एक अहम पहलू यह है कि निर्माणाधीन प्रॉपर्टीज़ अब पूंजी बढ़ोतरी (Capital Appreciation) का बेहतर विकल्प बनती जा रही हैं। शुरुआती कीमतों पर निवेश करके कुछ सालों में अच्छा रिटर्न हासिल किया जा सकता है, क्योंकि मांग और सप्लाई का यह नया समीकरण बाजार को नया आकार दे रहा है।

निष्कर्ष – सपनों का घर अब फैशन के साथ आता है, और कीमत के साथ भी
अब ‘सस्ता है क्योंकि अधूरा है’ वाली सोच पुरानी हो गई है। नए जमाने का होमबायर भविष्य की सोच के साथ निवेश कर रहा है – बेहतर डिजाइन, एडवांस फीचर्स और लोकेशन की अहमियत को प्राथमिकता दे रहा है।

तो अगली बार जब आप घर खरीदने निकलें, तो इस नई हकीकत को समझकर कदम बढ़ाइए – क्योंकि अब अधूरा घर, पूरी कीमत मांगता है!

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