April 17, 2026

संभल में जामा मस्जिद हिंसा मामले में पुलिस ने सदर जफर अली को हिरासत में लिया, SIT कर रही पूछताछ

संभल, 23 मार्च 2025 – उत्तर प्रदेश के संभल जिले की जामा मस्जिद में 24 नवंबर 2024 को हुई हिंसा के मामले में एक नई मोड़ आया है। पुलिस ने जामा मस्जिद के सदर, जफर अली को हिरासत में ले लिया है और उनसे इस हिंसा के संबंध में पूछताछ की जा रही है। यह कार्रवाई उस हिंसा की जांच के तहत की जा रही है, जिसमें 4 लोगों की मौत हो गई थी और कई अन्य लोग घायल हो गए थे। इस हिंसा के बाद से ही पुलिस की ओर से लगातार गिरफ्तारियां की जा रही हैं, और अब तक 50 से ज्यादा लोग जेल भेजे जा चुके हैं, जिनमें महिलाएं भी शामिल हैं।

हिंसा के बाद से लगातार कार्रवाई
24 नवंबर को जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान हिंसा भड़क गई थी। स्थानीय अदालत के आदेश पर जामा मस्जिद का सर्वे किया जा रहा था, लेकिन इस पर प्रदर्शनकारियों ने आपत्ति जताई और पुलिस से भिड़ गए। हिंसा के दौरान गोलीबारी, पथराव और तोड़फोड़ की घटनाएं हुईं, जिसके परिणामस्वरूप 4 लोगों की मौत हो गई और उप जिलाधिकारी रमेश चंद्र समेत 20 लोग घायल हुए। इस हिंसा के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव फैल गया, और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए संभल तहसील में इंटरनेट सेवाएं भी बंद कर दी गईं।

SIT की पूछताछ
संभल हिंसा की जांच अब एसआईटी (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) द्वारा की जा रही है, और एसआईटी ने जामा मस्जिद कमेटी के सदर जफर अली से पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। यह पहली बार है जब शाही जामा मस्जिद कमेटी के सदर से इस मामले में पूछताछ हो रही है। पुलिस ने जफर अली को पूछताछ के लिए बुलाया था, और उन्हें एसपी श्रीश चंद्र और CO सदर अनुज चौधरी द्वारा हिरासत में लिया गया।

पुलिस का सुरक्षा इंतजाम
सवालों के घेरे में आई जामा मस्जिद हिंसा के मद्देनजर, पुलिस ने जामा मस्जिद के आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी है। इलाके में भारी संख्या में पुलिस बल, पीएसी (पुलिस एवियेशन कमांड) और RAF (रैपिड एक्शन फोर्स) तैनात किए गए हैं ताकि किसी भी अप्रत्याशित स्थिति से निपटा जा सके। पुलिस का कहना है कि उन्होंने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं, और स्थिति को शांतिपूर्ण बनाने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए गए हैं।

क्या था पूरा मामला?
24 नवंबर को जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान हिंसा का भड़कना, एक याचिका पर आधारित था, जिसमें दावा किया गया था कि जिस जगह पर जामा मस्जिद स्थित है, वह पहले एक हरिहर मंदिर था। इस याचिका पर स्थानीय अदालत ने आदेश दिया था कि जामा मस्जिद का सर्वे किया जाए, जिससे विवाद उठने के बाद विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। पुलिस से झड़प में हिंसा बढ़ी, और इसके परिणामस्वरूप गोलीबारी और पथराव की घटनाएं हुईं, जिसमें कई लोग घायल हुए और 4 की मौत हो गई।

जांच की दिशा
एसआईटी इस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हिंसा के दौरान क्या कुछ बड़ी साजिश हो सकती थी। साथ ही, हिंसा में शामिल सभी लोगों की पहचान कर उन्हें सजा दिलाने का भी प्रयास किया जा रहा है। पुलिस और प्रशासन की ओर से इस मामले में पूरी ईमानदारी से कार्रवाई की जा रही है और दोषियों को सलाखों के पीछे पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

आगे की कार्रवाई
अदालत द्वारा दिए गए आदेशों के तहत जामा मस्जिद का सर्वे अब भी जारी है, लेकिन इस दौरान विवाद और हिंसा की आशंका को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था और सख्त कर दी गई है। इसके साथ ही, पुलिस और प्रशासन का कहना है कि वे इस मामले की पूरी गंभीरता से जांच कर रहे हैं, ताकि भविष्य में ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति न हो और शांतिपूर्ण माहौल कायम रहे।

यह मामला संभल में धार्मिक और सामाजिक तनाव को लेकर एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच चुका है, और इसकी जांच में पुलिस, प्रशासन और न्यायपालिका का पूरा ध्यान है।

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