भारत, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी: क्या मध्य पूर्व के भविष्य पर होगा असर?
विदेश मंत्री एस जयशंकर और इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन के दौरान एक अहम बैठक की, जिसमें उन्होंने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के एशिया, यूरोप और अमेरिका को जोड़ने के दृष्टिकोण पर चर्चा की। दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय सुरक्षा और व्यापारिक मार्गों पर बढ़ते खतरे के बारे में विचार विमर्श किया, विशेष रूप से हूतियों और ईरान द्वारा व्यापारिक रास्तों पर किए गए हमलों के संदर्भ में। इजरायल के विदेश मंत्री के कार्यालय की ओर से जारी एक बयान में बताया गया कि यह मुलाकात सुरक्षा और कूटनीतिक मामलों पर चर्चा करने के लिए महत्वपूर्ण वैश्विक मंच के रूप में हुई थी।
इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने इस अवसर पर कहा कि इजरायल अपने भारत के साथ संबंधों को रणनीतिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण मानता है। वहीं, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ एक संयुक्त सम्मेलन में कहा था कि अमेरिका और भारत मिलकर इतिहास के सबसे बड़े व्यापारिक रास्तों में से एक का निर्माण करेंगे। इस मार्ग के जरिए भारत से इजरायल, इटली और फिर संयुक्त राज्य अमेरिका तक समुद्र, रेलमार्ग और केबल्स के माध्यम से एक कनेक्टिविटी नेटवर्क तैयार किया जाएगा। ट्रम्प ने इसे एक बड़ी उपलब्धि करार देते हुए कहा कि इसमें भारी निवेश की आवश्यकता होगी और इस परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए और भी अधिक वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता होगी।
इससे पहले, 2023 जी-20 शिखर सम्मेलन में भारत ने मध्य पूर्व के माध्यम से यूरोप तक एक नई बुनियादी ढांचा परियोजना की घोषणा की थी, जो क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को नए आयाम दे सकती है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इसे ‘हमारे इतिहास की सबसे बड़ी सहयोग परियोजना’ बताया था, और कहा था कि इस परियोजना से मध्य पूर्व और इजरायल की स्थिति में महत्वपूर्ण बदलाव आएगा, जिसका असर वैश्विक स्तर पर होगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रधानमंत्री नेतन्याहू के बीच इस परियोजना पर पहले भी कई बार चर्चा हो चुकी है, खासकर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में नौवहन की स्वतंत्रता को लेकर। दोनों नेताओं ने बाब-अल-मंडेब के जलमार्ग को सुरक्षित रखने के महत्व पर बल दिया था, जो अब एक बार फिर से संघर्ष का केंद्र बन चुका है। ईरान समर्थित हूथी विद्रोहियों के लगातार हमलों से यह मार्ग खतरे में है। हूथी समूह का दावा है कि वे इजरायल से जुड़े जहाजों को निशाना बना रहे हैं, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर नई चिंता बढ़ गई है।
हाल ही में इजरायल और हमास के बीच संघर्ष के दौरान, हूथियों ने इस रणनीतिक जलक्षेत्र में जहाजों पर बार-बार हमले किए हैं, जिससे इस क्षेत्र में वैश्विक व्यापारिक गतिविधियों को एक नई चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।
क्या यह परियोजना, जो भारत, इजरायल और अमेरिका के बीच साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम हो सकती है, क्षेत्रीय स्थिरता में योगदान करेगी? या फिर ईरान और हूथी समूह के आक्रमणों के कारण यह योजना अपनी सफलता के रास्ते में नई बाधाएं देखेगी? समय आने पर यह निश्चित होगा कि ये प्रयास भविष्य में मध्य पूर्व और वैश्विक व्यापार को किस दिशा में ले जाएंगे।
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