यूक्रेन युद्ध में रूस के सैनिकों को अचानक करोड़पति क्यों बना दिया गया?
यूक्रेन और रूस के बीच चल रही जंग अब केवल बारूदी नहीं रही — यह पैसे, इनाम और रणनीति का भी युद्ध बन चुका है। इसी कड़ी में हाल ही में एक ऐसा वाकया सामने आया जिसने सबको चौंका दिया। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मौजूदगी में एक बॉर्डर पर विशेष समारोह हुआ, जहां 12 रूसी सैनिकों को अचानक करोड़ों रुपये इनाम में दे दिए गए। न कोई पदोन्नति, न कोई योजना — फिर आख़िर ऐसा क्या कर दिया इन जवानों ने जो वो एक झटके में करोड़पति बन गए?
असल में, रूस ने दावा किया है कि उसके सैनिकों ने हाल ही में यूक्रेन युद्ध के दौरान अमेरिकी एफ-16 फाइटर जेट को मार गिराया है। ये वही फाइटर जेट है जिसकी यूक्रेन को अमेरिका और यूरोपीय देशों से लंबे समय से दरकार थी और जिसे डेनमार्क, नीदरलैंड्स, नॉर्वे, बेल्जियम और ग्रीस जैसे देशों ने 2024 की गर्मियों में सप्लाई करना शुरू किया था। अब कुछ एफ-16 यूक्रेनी पायलटों के साथ युद्ध क्षेत्र में मौजूद हैं, जिनकी ट्रेनिंग रोमानिया स्थित एफ-16 ट्रेनिंग सेंटर में हुई है।
रूसी पक्ष का दावा है कि अप्रैल 2025 में यूक्रेन के कब्ज़े वाले इलाके में एक एफ-16 जेट को 40N6 लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल से गिराया गया। यह हमला किसी आम रॉकेट या स्टिंगर से नहीं बल्कि एडवांस्ड मिसाइल तकनीक के जरिए हुआ। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि हाल ही में दिया गया इनाम इसी घटना के लिए है या किसी अन्य ऑपरेशन के लिए। रूस का यह भी कहना है कि अब तक तीन एफ-16 फाइटर जेट क्रैश हो चुके हैं, जिनमें से एक को दुश्मन की कार्रवाई से गिराया जाना पुष्ट हुआ है, जबकि बाकी दो की जांच चल रही है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इनाम देने वाला कोई सरकारी मंत्रालय या रक्षा विभाग नहीं था, बल्कि रूस की एक प्रमुख तेल कंपनी Fores ने यह जिम्मेदारी ली। इस कंपनी ने उन 12 सैनिकों को कुल 1.5 करोड़ रूबल यानी लगभग 1.6 लाख अमेरिकी डॉलर (करीब 13.5 करोड़ रुपये) का इनाम दिया, जिन्होंने पहले एफ-16 को गिराने का कारनामा किया। Fores कंपनी ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि जो भी सैनिक सबसे पहले अमेरिकी एफ-16 को मार गिराएगा, उसे बड़ा इनाम मिलेगा — और अब वादा निभा दिया गया है।
Fores कंपनी पहले भी इस तरह के इनाम बांट चुकी है — जैसे नाटो से मिले टैंकों को तबाह करने वाले सैनिकों को विशेष पुरस्कार। कंपनी रूस की युद्ध रणनीति का हिस्सा बन चुकी है, जहां पश्चिमी हथियारों को निशाना बनाने पर खासतौर पर इनाम दिया जाता है। अब तक यह कंपनी युद्ध क्षेत्र में 30 लाख डॉलर से अधिक मूल्य का सामान भेज चुकी है जिसमें ड्रोन जैमर, थर्मल साइट, मेडिकल उपकरण और दवाइयां शामिल हैं।
यूक्रेन को भले ही अमेरिका और यूरोप से अत्याधुनिक हथियारों की सप्लाई हो रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत ये है कि उन्हें ऑपरेशन, मेंटेनेंस और स्पेयर पार्ट्स की भारी कमी से जूझना पड़ रहा है। दूसरी ओर, रूस सैनिकों का मनोबल बढ़ाने के लिए न सिर्फ युद्ध नीति अपना रहा है बल्कि उन्हें करोड़ों की प्राइवेट इनामी योजनाओं के ज़रिए और भी आक्रामक बना रहा है।
यह घटना अब केवल युद्ध की नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेश और आर्थिक युद्ध नीति का भी प्रतीक बन चुकी है — जिसमें बंदूक से ज्यादा कीमत अब एक एफ-16 की ‘kill’ पर लग रही है।
Share this content:
