कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को अपने रायबरेली दौरे के दौरान एक खास और भावुक कर देने वाला तोहफा मिला। उन्हें उनके दादा और स्वतंत्रता सेनानी फिरोज गांधी का करीब 88 साल पुराना ड्राइविंग लाइसेंस सौंपा गया, जो 1938 में लंदन में बना था। यह लाइसेंस दशकों से एक स्थानीय परिवार द्वारा सहेजकर रखा गया था और अब सही हाथों तक पहुंचा। मंच पर यह ऐतिहासिक दस्तावेज मिलते ही राहुल गांधी भावुक नजर आए और उन्होंने तुरंत अपनी मां सोनिया गांधी को फोन कर इस खुशी की जानकारी दी।
राहुल गांधी रायबरेली के दौरे पर हैं और अपने दौरे के दूसरे दिन वह रायबरेली प्रीमियर लीग क्रिकेट टूर्नामेंट के उद्घाटन समारोह में शामिल होने पहुंचे थे। इसी कार्यक्रम के दौरान आयोजन समिति से जुड़े विकास सिंह ने मंच पर राहुल गांधी को यह ड्राइविंग लाइसेंस सौंपा। बताया गया कि लाइसेंस मिलने के बाद राहुल गांधी ने उसे ध्यान से देखा और फिर मंच से ही सोनिया गांधी को कॉल कर इस ऐतिहासिक दस्तावेज के मिलने की जानकारी साझा की। इस पल को वहां मौजूद लोगों ने भी बेहद भावुक और खास बताया।
विकास सिंह ने बताया कि यह ड्राइविंग लाइसेंस कई साल पहले रायबरेली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उनके ससुर को मिला था। उन्होंने इस दस्तावेज की ऐतिहासिक अहमियत को समझते हुए इसे संभालकर रखा। उनके निधन के बाद यह जिम्मेदारी उनकी पत्नी यानी विकास सिंह की सास ने निभाई और लाइसेंस को सुरक्षित रखा। सिंह के मुताबिक, जब उन्हें पता चला कि राहुल गांधी रायबरेली आ रहे हैं, तो उन्होंने तय किया कि यह दस्तावेज अब उन्हें सौंप देना चाहिए, क्योंकि यह उनके परिवार की विरासत का हिस्सा है।
लाइसेंस मिलने के बाद राहुल गांधी ने उसकी एक तस्वीर अपनी मां सोनिया गांधी के साथ व्हाट्सऐप पर भी साझा की। फिरोज गांधी का जन्म दिसंबर 1912 में हुआ था और उन्होंने 1952 में देश के पहले आम चुनाव में जीत दर्ज कर रायबरेली का प्रतिनिधित्व किया था। वह नेहरू-गांधी परिवार के उन सदस्यों में शामिल रहे, जिन्होंने लोकतांत्रिक मूल्यों और सार्वजनिक जीवन में सादगी की मिसाल कायम की। उनका निधन 7 सितंबर 1960 को हुआ था।
इस घटना को राहुल गांधी और गांधी परिवार के लिए एक भावनात्मक क्षण माना जा रहा है। दशकों बाद परिवार से जुड़ा एक ऐतिहासिक दस्तावेज वापस मिलना न सिर्फ निजी खुशी का विषय है, बल्कि रायबरेली और देश के राजनीतिक इतिहास से जुड़ी एक याद भी है, जिसे अब फिर से सम्मान के साथ सहेजा जाएगा।
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