क्यूएफएक्स और बोटब्रो घोटाला: ईडी की कार्रवाई से खुलासा, मनी लॉन्ड्रिंग और धोखाधड़ी का बड़ा नेटवर्क
क्या आपने कभी सोचा था कि एक साधारण निवेश योजना आपकी मेहनत की कमाई को लूटने का सबसे बड़ा औजार बन सकती है? प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एक ऐसे धोखाधड़ी के नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जो न केवल लोगों के पैसे हड़पने के लिए नए तरीके खोज रहा था, बल्कि इसके पीछे मनी लॉन्ड्रिंग और शेल कंपनियों का भी गहरा जुड़ाव था। क्यूएफएक्स ट्रेड लिमिटेड और उससे जुड़ी अन्य कंपनियों पर मनी लॉन्ड्रिंग के तहत जांच शुरू की गई है, और इस मामले ने कई बड़े नामों को सामने लाया है, जिनमें प्रमुख आरोपी नवाब अली उर्फ लविश चौधरी का नाम शामिल है।
बोटब्रो की धोखाधड़ी और फॉरेक्स ट्रेडिंग का झांसा
नवाब अली उर्फ लविश चौधरी, जो उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर का निवासी है, ने बोटब्रो नामक एक MLM (मल्टी-लेवल मार्केटिंग) कंपनी की शुरुआत की थी। इस कंपनी का दावा था कि यह एआई रोबोट्स की मदद से फॉरेक्स ट्रेडिंग करती है और निवेशकों को ऑटोमैटिक तरीके से मुनाफा देती है। बोटब्रो वेबसाइट botbro.biz पर लोगों को तीन प्रकार के निवेश योजनाओं में पैसा लगाने का लालच दिया जाता था। इनमें तयशुदा आय और टीएलसी कॉइन के माध्यम से कमाई का वादा किया गया था।
इस तरह के आकर्षक प्रस्ताव ने हजारों निवेशकों को अपनी जाल में फंसाया, और वे अपनी जीवनभर की बचत को इस फर्जी निवेश योजना में लगा बैठे।
11 फरवरी 2025: ईडी की छापेमारी, 170 करोड़ रुपये फ्रीज
11 फरवरी, 2025 को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने दिल्ली, नोएडा, रोहतक और शामली (उत्तर प्रदेश) में छापेमारी की। इस दौरान 30 से अधिक बैंक खातों में जमा 170 करोड़ रुपये को फ्रीज कर दिया गया और 90 लाख रुपये नकद बरामद किए गए। इसके अलावा, कई आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल उपकरण जब्त किए गए। ईडी की टीम ने इसके साथ-साथ एक अवैध हवाला नेटवर्क का भी खुलासा किया, जो इस घोटाले में संलिप्त था।
क्यूएफएक्स और वाईएफएक्स से धोखाधड़ी का बड़ा खुलासा
हिमाचल प्रदेश पुलिस के द्वारा क्यूएफएक्स ट्रेड लिमिटेड के खिलाफ दर्ज की गई कई शिकायतों के बाद, ईडी ने इस घोटाले की जांच शुरू की। जांच में पता चला कि क्यूएफएक्स और इसके एजेंट्स ने MLM स्कीम के तहत निवेशकों को 5% से 15% तक मासिक रिटर्न का लालच दिया था। जैसे ही क्यूएफएक्स के खिलाफ शिकायतें बढ़ीं, इसने अपनी योजना का नाम बदलकर वाईएफएक्स (यॉर्कर एफएक्स) कर दिया, लेकिन ठगी के तरीके वही रहे।
फॉरेक्स ट्रेडिंग और पिरामिड स्कीम
जांच में यह भी सामने आया कि नवाब अली उर्फ लविश चौधरी ने बोटब्रो, टीएलसी कॉइन, और वाईएफएक्स जैसी योजनाओं के जरिए फॉरेक्स ट्रेडिंग के नाम पर लोगों को धोखा दिया। ये सभी योजनाएं MLM पिरामिड मॉडल पर आधारित थीं, जिसमें पुराने निवेशकों को नए निवेशकों से मिलने वाले पैसों से रिटर्न दिया जाता था।
घोटाले का तरीका
यह घोटाला बेहद संगठित और योजनाबद्ध तरीके से चल रहा था, जहां निवेशकों से पैसे जमा कराने के लिए नकद या बेनामी खातों का सहारा लिया जाता था। रिटर्न को नकद या टीएलसी 2.0 कॉइन के रूप में दिया जाता था, जिसका दावा था कि यह मार्च 2027 में लॉन्च होगा। इसके अलावा, निवेशकों को विदेश यात्राओं और महंगी गाड़ियों का भी लालच दिया जाता था, जिससे वे अधिक से अधिक निवेश करें।
शेल कंपनियों का इस्तेमाल
इस पूरी धोखाधड़ी में एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया। जांच में यह पता चला कि एनपे बॉक्स प्राइवेट लिमिटेड, कैप्टर मनी सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड, और टाइगर डिजिटल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड जैसी शेल कंपनियों का इस्तेमाल किया गया था। इन कंपनियों का उद्देश्य था निवेशकों से पैसे इकट्ठा करना और उन्हें धोखे से घुमाना-फिराना।
ईडी की जांच और आगे की कार्रवाई
ईडी की इस जांच ने अब तक इस धोखाधड़ी नेटवर्क के कई परतों को उजागर किया है, लेकिन यह केवल शुरुआत है। यह देखा जाना है कि आगे चलकर और कौन से महत्वपूर्ण खुलासे होते हैं और क्या दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
यह घोटाला केवल वित्तीय धोखाधड़ी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक बड़े मनी लॉन्ड्रिंग और शेल कंपनियों के नेटवर्क का हिस्सा प्रतीत होता है। अब यह प्रश्न उठता है कि क्या आने वाले समय में और भी ऐसे धोखाधड़ी नेटवर्क सामने आएंगे, और क्या हमारी जांच एजेंसियां इस प्रकार के संगठित अपराधों से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं?
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