May 1, 2026

मॉस्को, रूस: पुतिन का बड़ा खुलासा – हर दिन यूक्रेन की 125 किमी जमीन पर बढ़ रहा रूसी कब्जा, अब तक 20% क्षेत्र रूस के नियंत्रण में

रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध को तीन साल से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन हालात शांत होने के बजाय और जटिल होते जा रहे हैं। इस बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पहली बार खुलकर यूक्रेन पर कब्जे को लेकर बड़ा बयान दिया है। मॉस्को में पत्रकारों से बातचीत के दौरान पुतिन ने बताया कि इस साल रूस ने अब तक 5,000 वर्ग किलोमीटर जमीन पर कब्जा किया है। उन्होंने कहा कि रूस का मिशन अपने तय लक्ष्य की ओर लगातार आगे बढ़ रहा है और अब तक यूक्रेन के कुल 20 प्रतिशत हिस्से पर रूसी सेना का नियंत्रण है।

 

रिपोर्ट्स के मुताबिक रूस ने 2022 में जंग की शुरुआत के बाद से यूक्रेन की लगभग 1,20,000 वर्ग किलोमीटर जमीन पर कब्जा कर लिया है। यूक्रेन का कुल क्षेत्रफल 6,03,628 वर्ग किलोमीटर है। यानी पुतिन के बयान के अनुसार, रूस अब तक यूक्रेन के एक बड़े हिस्से को अपने कब्जे में ले चुका है। औसतन देखा जाए तो रूसी सेना हर दिन लगभग 125 किमी इलाके को कैप्चर कर रही है। यह आंकड़ा बताता है कि रूस की सैन्य रणनीति लगातार आक्रामक होती जा रही है और वह दक्षिणी व पूर्वी यूक्रेन में अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है।

 

रूस ने यूक्रेन के डोनबास, डोनेस्क, लुहांस्क, जपोरिजिया और खेरसोन जैसे रणनीतिक रूप से अहम इलाकों पर कब्जा जमा लिया है। व्हाइट हाउस में जारी यूक्रेनी रिपोर्ट के अनुसार, रूस लुहांस्क के 99%, डोनेस्क के 76%, जपोरिजिया के 73% और खेरसोन के 73% भूभाग पर नियंत्रण कर चुका है। रूस की रणनीति ब्लैक सी से यूक्रेन के संपर्क को पूरी तरह काटने की है ताकि यूक्रेन की आर्थिक और समुद्री गतिविधियों को सीमित किया जा सके। 2014 में रूस पहले ही क्रीमिया पर कब्जा कर चुका है, जो अब भी उसके नियंत्रण में है।

 

वहीं, यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि जंग में रूस को भी भारी नुकसान हुआ है। उनके मुताबिक अब तक रूस के 11 लाख से अधिक सैनिक मारे जा चुके हैं या घायल हुए हैं। साथ ही, यूक्रेन ने 11,238 रूसी टैंक, 427 विमान और 28 नौकाओं को नष्ट करने का दावा किया है। यूक्रेनी रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि रूस को उत्तर कोरिया से प्रत्यक्ष सैन्य सहयोग मिल रहा है, जिससे उसकी आक्रामकता और बढ़ी है।

 

विशेषज्ञों का मानना है कि पुतिन का यह बयान सिर्फ सैन्य सफलता का दावा नहीं बल्कि पश्चिमी देशों को एक रणनीतिक संदेश भी है। रूस यह दिखाना चाहता है कि लंबी जंग के बावजूद वह पीछे नहीं हट रहा और धीरे-धीरे यूक्रेन के और हिस्सों पर अपना प्रभाव बढ़ा रहा है। वहीं यूक्रेन ने कहा है कि वह अपने खोए हुए भूभाग को वापस पाने के लिए हर स्तर पर संघर्ष जारी रखेगा। इस युद्ध ने न केवल दोनों देशों को आर्थिक रूप से कमजोर किया है, बल्कि यूरोप की सुरक्षा व्यवस्था को भी पूरी तरह से हिला दिया है।

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