आर-पार के मूड में पुतिन, रूस ने कीव में यूरोपीय यूनियन और ब्रिटिश काउंसिल के दफ्तर पर हमला
यूक्रेन युद्ध ने शुक्रवार (29 अगस्त) को एक नया मोड़ ले लिया, जब रूस ने कीव स्थित यूरोपीय यूनियन (EU) और ब्रिटिश काउंसिल के दफ्तर पर जोरदार अटैक किया। इस हमले में दोनों दफ्तर पूरी तरह तबाह हो गए। तीन साल से जारी इस जंग में यह पहला मौका है जब रूस ने सीधे तौर पर ब्रिटेन और यूरोपीय यूनियन को निशाना बनाया है। हमले के तुरंत बाद ब्रिटेन ने लंदन स्थित रूसी राजदूत को तलब किया है।
ब्रिटिश अखबार डेली मेल की रिपोर्ट के अनुसार, पुतिन ने इस हमले के जरिए साफ कर दिया है कि वे युद्धविराम समझौते के दबाव में झुकने वाले नहीं हैं। यह हमला ठीक उस बयान के बाद हुआ, जिसमें यूरोपीय यूनियन प्रमुख उर्सूला बेन डार ने कहा था कि पुतिन को किसी न किसी तरह शांति वार्ता की टेबल पर आना ही होगा। पुतिन ने इसके जवाब में पश्चिमी देशों को संदेश देने के लिए यह सीधा कदम उठाया।
इस हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है। ब्रिटिश काउंसिल और ईयू के दफ्तर पर अटैक से अमेरिका भी नाराज बताया जा रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, जो फिलहाल शांति समझौते को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं, इस घटनाक्रम से असहज स्थिति में आ गए हैं। ट्रंप पहले ही पुतिन और जेलेंस्की से मुलाकात कर चुके हैं और जल्द ही दोनों नेताओं को एक साथ लाने का प्रयास कर रहे हैं। रूस का यह हमला इन कूटनीतिक कोशिशों पर बड़ा झटका माना जा रहा है।
अब सवाल यह है कि आगे क्या होगा। रूस ने अपने इरादे साफ कर दिए हैं, लेकिन यूरोप और ब्रिटेन की प्रतिक्रिया अभी तक स्पष्ट नहीं है। दोनों देश वेट एंड वॉच की रणनीति पर चलते दिखाई दे रहे हैं और अमेरिका के अगले कदम पर नजरें गड़ाए हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिमी ताकतें रूस के इस हमले पर सख्त रुख अपनाती हैं तो यूक्रेन युद्ध और अधिक भड़क सकता है। वहीं, अगर समझौते की दिशा में प्रयास जारी रहते हैं, तो आने वाले दिनों में कूटनीति के जरिए हालात को काबू करने की संभावना भी बनी हुई है।
कुल मिलाकर, रूस का यह हमला केवल यूक्रेन तक सीमित नहीं है बल्कि पश्चिमी देशों को सीधी चुनौती है। इससे यह साफ हो गया है कि पुतिन अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं और जब तक उनकी शर्तों पर समझौता नहीं होता, तब तक युद्ध का दायरा और बढ़ सकता है।
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