रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच ऊर्जा क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया। संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति पुतिन ने घोषणा की कि रूस भारत को Small Modular Reactor (SMR) यानी पोर्टेबल न्यूक्लियर रिएक्टर तकनीक उपलब्ध कराने को तैयार है। यह तकनीक भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। मोदी ने कहा कि भारत–रूस संबंध लगातार नए माइलस्टोन हासिल कर रहे हैं, और SMR तकनीक पर सहयोग से यह साझेदारी और मजबूत होगी। पुतिन ने भी इसे रणनीतिक साझेदारी का नया अध्याय बताया।
SMR तकनीक क्या है, इसे समझना बेहद जरूरी है। Small Modular Reactor छोटे आकार के आधुनिक न्यूक्लियर प्लांट होते हैं, जिन्हें स्थापित करना आसान है और यह बेहद कम जगह घेरते हैं। ये पारंपरिक परमाणु ऊर्जा प्लांट की तुलना में कम लागत वाले, सुरक्षित और पोर्टेबल होते हैं। पारंपरिक प्लांट जहां 1000 मेगावॉट या उससे अधिक क्षमता के होते हैं, वहीं SMR आमतौर पर 300 मेगावॉट तक की क्षमता पर काम करते हैं। इन्हें मॉड्यूल की तरह बनाया जाता है और जरूरत पड़ने पर अलग-अलग स्थानों तक पहुंचाया भी जा सकता है। दूर–दराज इलाकों, पहाड़ी क्षेत्रों और उन जगहों पर जहां बड़े प्लांट लगाना संभव नहीं, वहां SMR समाधान बन सकते हैं।
रूस पहले ही इस तकनीक में अग्रणी है। उसका ‘Akademik Lomonosov’ दुनिया का पहला फ़्लोटिंग न्यूक्लियर पावर स्टेशन है, जिसने 2020 से बिजली उत्पादन शुरू कर दिया है। इस फ्लोटिंग स्टेशन की खासियत यह है कि इसे समुद्र में तैरते हुए जरूरत के अनुसार स्थानांतरित किया जा सकता है। रूस इसी मॉडल को भारत के सामने भी लेकर आया है। इससे बंदरगाह क्षेत्रों, द्वीपों या उन हिस्सों में जहां पारंपरिक बिजली पहुंचाना मुश्किल है, SMR का उपयोग किया जा सकेगा।
भारत पहले से ही रूस के साथ कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट पर काम कर रहा है, जो तमिलनाडु में एशिया के सबसे बड़े न्यूक्लियर प्रोजेक्ट्स में से एक है। यहां 6 रिएक्टर बनाए जा रहे हैं, जिनमें से 3 रिएक्टर पहले ही भारत के ऊर्जा ग्रिड से जुड़ चुके हैं। बाकी 3 रिएक्टर निर्माण के विभिन्न चरणों में हैं। पूरा प्रोजेक्ट तैयार होने पर यहां से 6000 मेगावॉट बिजली प्राप्त होगी। इस बीच SMR तकनीक जुड़ने से भारत की परमाणु ऊर्जा क्षमता और व्यापक हो जाएगी और बिजली आपूर्ति को स्थिर रखने में बड़ी मदद मिलेगी।
भारत SMR तकनीक को कई रणनीतिक क्षेत्रों में लगाने पर विचार कर रहा है। इनमें डेटा सेंटर, प्रमुख औद्योगिक इकाइयाँ, पहाड़ी और दूर-दराज के इलाके, रेलवे की बड़ी परियोजनाएँ—जैसे ऋषिकेश–कर्णप्रयाग लाइन—और उन स्थानों शामिल हैं जहां पारंपरिक ग्रिड पहुंचाना मुश्किल है। SMR भविष्य में बेस–लोड बिजली उपलब्ध करवाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं, जिससे देश की थर्मल प्लांटों पर निर्भरता कम होगी।
भारत की तेजी से बढ़ती ऊर्जा मांग, बढ़ते डेटा उपयोग, औद्योगिक विस्तार और कार्बन उत्सर्जन कम करने की चुनौती के बीच SMR तकनीक एक भरोसेमंद विकल्प के रूप में उभर रही है। यह तकनीक न सिर्फ स्वच्छ ऊर्जा का विकल्प है, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और दूरस्थ क्षेत्रों तक बिजली पहुंचाने में भारत के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती है।
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