पुलवामा आतंकी हमले की सातवीं बरसी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राहुल गांधी और उपराष्ट्रपति ने शहीदों को दी श्रद्धांजलि
14 फरवरी 2019 को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले में हुए भीषण आतंकी हमले की सातवीं बरसी पर देशभर में शहीद जवानों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन वीर सैनिकों को याद करते हुए उन्हें ‘बहादुर हीरो’ बताया और कहा कि राष्ट्र उनके सर्वोच्च बलिदान को कभी नहीं भूलेगा। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि देश की सुरक्षा के लिए प्राण न्योछावर करने वाले जवानों का साहस और समर्पण हर नागरिक को प्रेरित करता रहेगा। पुलवामा हमला भारतीय सुरक्षा इतिहास के सबसे दर्दनाक अध्यायों में से एक माना जाता है।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी शहीदों को नमन करते हुए कहा कि 2019 में हुए इस कायराना आतंकी हमले में जान गंवाने वाले जवानों का बलिदान देश सदैव याद रखेगा। उन्होंने कहा कि भारत माता की रक्षा में अपने प्राणों की आहुति देने वाले सैनिकों के प्रति पूरा देश कृतज्ञ है। राहुल गांधी ने इस दिन को शोक और संकल्प दोनों का प्रतीक बताया, जहां एक ओर देश शहीदों को श्रद्धांजलि देता है, वहीं दूसरी ओर आतंकवाद के खिलाफ अपनी प्रतिबद्धता दोहराता है।
उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने भी हमले की बरसी पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि पुलवामा के वीर जवानों का सर्वोच्च बलिदान राष्ट्र को एकजुट और मजबूत भारत के निर्माण के लिए प्रेरित करता रहेगा। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए जो त्याग इन जवानों ने किया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए उदाहरण बना रहेगा। बरसी के मौके पर कई स्थानों पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए गए और शहीदों को पुष्पांजलि अर्पित की गई।
14 फरवरी 2019 को श्रीनगर-जम्मू राष्ट्रीय राजमार्ग पर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के काफिले को एक आत्मघाती हमलावर ने निशाना बनाया था। विस्फोटकों से लदी एक गाड़ी ने काफिले की बस को टक्कर मार दी, जिससे 40 जवान शहीद हो गए। उस समय काफिले में 78 बसों के जरिए लगभग 2,500 जवान जम्मू से श्रीनगर की ओर जा रहे थे। इस हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था और इसे भारत के इतिहास के सबसे घातक आतंकी हमलों में गिना गया।
हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी कड़ी निंदा हुई और भारत ने आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाया। पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने हमले की जिम्मेदारी ली थी। इसके जवाब में भारत ने सीमा पार आतंकी ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की कार्रवाई की, जिसके बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव काफी बढ़ गया। पुलवामा हमला आज भी देश की सुरक्षा नीति और आतंकवाद के खिलाफ रणनीति में एक निर्णायक मोड़ के रूप में याद किया जाता है।
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