“मुझे बुरा लग रहा है…” – खिलाड़ियों के विवाद में घसीटे जाने पर पीटी उषा ने तोड़ी चुप्पी!
नई दिल्ली। भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) की अध्यक्ष और पूर्व दिग्गज एथलीट पीटी उषा ने हाल ही में भारतीय खेल जगत में चल रहे विवादों को लेकर अपनी गहरी नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों को प्रशासनिक झगड़ों में घसीटना दुर्भाग्यपूर्ण है और इसका उनके प्रदर्शन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
यह बयान उस समय आया है जब भारतीय मुक्केबाजी महासंघ (बीएफआई) के अधिकारियों के बीच चल रहे आंतरिक विवाद ने महिला राष्ट्रीय मुक्केबाजी चैंपियनशिप को प्रभावित किया है। खासकर, टोक्यो ओलंपिक पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन और असम की टीम को इस विवाद के चलते चैंपियनशिप का बहिष्कार करने के लिए मजबूर होना पड़ा।
लवलीना को चैंपियनशिप से बाहर क्यों रहना पड़ा?
मामला तब गर्मा गया जब बीएफआई अध्यक्ष अजय सिंह ने हाल ही में महासंघ के महासचिव हेमंत कलिता को उनके पद से निलंबित कर दिया। इसके बाद कलिता ने कथित तौर पर असम की टीम, जिसमें लवलीना भी शामिल हैं, को चैंपियनशिप में भाग न लेने का निर्देश दिया। इस फैसले से न केवल खिलाड़ियों को नुकसान पहुंचा है, बल्कि चैंपियनशिप की गरिमा पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
पीटी उषा ने इस विवाद पर अपनी निराशा जताते हुए कहा, “मुझे बुरा लग रहा है कि खिलाड़ियों को इन झगड़ों में घसीटा जा रहा है। मैं चाहती थी कि सभी खिलाड़ी यहां आकर प्रतिस्पर्धा करें, लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हो सका।”
“खिलाड़ियों के हित के लिए आई हूं” – पीटी उषा
हाल ही में पीटी उषा ने बीएफआई के कामकाज की देखरेख के लिए एक तदर्थ समिति नियुक्त की थी, हालांकि अदालत ने इस फैसले पर रोक लगा दी। इसके बावजूद, उन्होंने महिला राष्ट्रीय मुक्केबाजी चैंपियनशिप में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और साफ किया कि उनकी मंशा सिर्फ खिलाड़ियों के हित में काम करने की है।
उषा ने कहा, “आमतौर पर मैं अंतिम समय पर दिए गए निमंत्रण स्वीकार नहीं करती, लेकिन मैं इस बार आई क्योंकि मैं चाहती थी कि यह प्रतियोगिता बिना रुकावट के पूरी हो।”
“मुक्केबाजों के लिए यह महत्वपूर्ण अवसर”
उषा ने माना कि इस तरह की राष्ट्रीय चैंपियनशिप खिलाड़ियों के करियर के लिए बेहद अहम होती है, खासकर तब जब मुक्केबाजी को लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 के लिए भी शामिल कर लिया गया है। उन्होंने कहा, “मुझे उन खिलाड़ियों के लिए दुख होता है जो इस विवाद के कारण प्रतियोगिता में भाग नहीं ले सकीं। ऐसा नहीं होना चाहिए था।”
“चुनौतियों से लड़ना होगा”
अपने खेल करियर की चुनौतियों को याद करते हुए उषा ने खिलाड़ियों को प्रेरित करते हुए कहा कि मुश्किलें हर खेल में आती हैं, लेकिन खेल भावना को बनाए रखना और अपनी स्पर्धा पर ध्यान केंद्रित करना ही असली जीत है।
उन्होंने कहा, “मेरे पूरे जीवन में बाधाएं और चुनौतियां रही हैं। लेकिन, मैं हमेशा अपनी स्पर्धा पर ध्यान देती रही। मैं चाहती हूं कि हमारे खिलाड़ी भी इसी जुनून और समर्पण के साथ आगे बढ़ें।”
क्रिस्टी कोवेंट्री के चुनाव पर खुशी
उषा ने अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) के नए प्रमुख के रूप में क्रिस्टी कोवेंट्री के चुनाव पर अपनी खुशी जाहिर की। क्रिस्टी न केवल इस पद पर पहुंचने वाली पहली महिला हैं, बल्कि पहली अफ्रीकी अधिकारी भी बनी हैं।
उषा ने कहा, “यह देखकर खुशी होती है कि एक महिला इस ऊंचे पद तक पहुंची है। मुझे उम्मीद है कि वह खेलों में महिलाओं की बेहतरी के लिए ठोस कदम उठाएंगी।”
क्या भारत करेगा 2036 ओलंपिक की मेजबानी?
भारत के 2036 ओलंपिक की मेजबानी के सपने को लेकर भी पीटी उषा ने आशावाद जताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह विजन है और वह इसे साकार करने के लिए अपनी पूरी कोशिश करेंगी।
उषा ने कहा, “आईओसी में अब मेरे कई दोस्त हैं और बहुत से लोग भारत के पक्ष में हैं। हम पूरी उम्मीद कर रहे हैं कि 2036 में भारत ओलंपिक की मेजबानी करेगा।”
क्या खत्म होंगे खेल प्रशासन के विवाद?
महिला मुक्केबाजी चैंपियनशिप में जो कुछ हुआ, उसने खेल प्रशासन में पारदर्शिता और खिलाड़ियों के हितों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीटी उषा जैसे अनुभवी खेल प्रशासक के नेतृत्व में क्या इन विवादों का अंत होगा और भारतीय खेल प्रणाली में सकारात्मक बदलाव आएगा? यह देखने वाली बात होगी।
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