पाकिस्तान में आतंकी हमलों की बाढ़: जो बोया वही काट रहा है!
पाकिस्तान में आतंकी घटनाएं अब बेकाबू होती जा रही हैं। कभी आतंकवाद को हथियार बनाकर दूसरे देशों में अस्थिरता फैलाने वाला पाकिस्तान, आज खुद उसी आग में जल रहा है। हाल ही में हुए आतंकवादी हमले इस बात की गवाही देते हैं कि अब पाकिस्तान अपने ही बोए आतंकवाद के बीज का फल चख रहा है।
बलूचिस्तान से खैबर पख्तूनवा तक आतंक का तांडव
पाकिस्तान के अलग-अलग हिस्सों में आतंकी गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। हाल ही में बलूचिस्तान में आतंकियों ने एक ट्रेन को हाईजैक कर लिया था, जिससे पूरे इलाके में दहशत फैल गई। वहीं, खैबर पख्तूनवा में भी पिछले हफ्ते तीन बड़े आतंकवादी हमले हुए। इस क्षेत्र में स्थित पेजो पुलिस स्टेशन और लखानी सीमा चौकी पर आतंकियों ने धावा बोल दिया।
पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, हमलावरों के पास रॉकेट लॉन्चर और अत्याधुनिक हथियार थे, जिससे यह साफ होता है कि ये हमले पहले से योजनाबद्ध थे। हालांकि, थर्मल इमेजिंग कैमरों की मदद से पाकिस्तान पुलिस ने आतंकियों की लोकेशन ट्रेस कर ली और समय रहते हमले को नाकाम कर दिया।
अफगान सीमा से घुसपैठ, 16 आतंकी ढेर
सिर्फ आतंकी हमले ही नहीं, बल्कि पाकिस्तान को अब अफगानिस्तान की सीमा से भी बड़े खतरे का सामना करना पड़ रहा है। पाकिस्तानी सेना के जनसंपर्क विभाग (ISPR) के अनुसार, उत्तरी वजीरिस्तान के गुलाम खान काली इलाके में 16 आतंकियों ने सीमा पार करने की कोशिश की, लेकिन पाकिस्तानी सेना ने तुरंत जवाबी कार्रवाई करते हुए उन्हें मार गिराया।
इस घटना के बाद, पाकिस्तान ने एक बार फिर अफगानिस्तान की तालिबान सरकार से अपील की है कि वह सीमा पर सुरक्षा को मजबूत करे और आतंकियों को पाकिस्तान में घुसपैठ से रोके। हालांकि, तालिबान की ओर से अब तक इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
तालिबान से अपील, लेकिन नतीजा सिफर
यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान ने तालिबान से सहयोग की गुहार लगाई है। इससे पहले भी कई बार पाकिस्तान ने अफगान नेतृत्व से आतंकवादियों को रोकने की मांग की, लेकिन इसका कोई असर नहीं हुआ। तालिबान का ढुलमुल रवैया साफ दिखाता है कि वह पाकिस्तान की समस्याओं को हल करने में ज्यादा रुचि नहीं रखता।
पाकिस्तान को अब वही आतंकवाद परेशान कर रहा है, जिसे उसने सालों तक भारत के खिलाफ पाला-पोसा। जिस तरह पाकिस्तान ने आतंकवाद को बढ़ावा दिया और इसे अपनी नीति का हिस्सा बनाया, अब वही नीति उसके लिए सिरदर्द बन गई है। पाकिस्तान सरकार और सेना ने कभी भी भारत में आतंकियों की घुसपैठ रोकने के लिए गंभीर कदम नहीं उठाए, और अब जब वही आतंकवाद पाकिस्तान को निगलने को तैयार है, तो उसे समझ आ रहा है कि यह आग कितनी घातक हो सकती है।
आतंक का जो बीज पाकिस्तान ने बोया था, अब वह एक विशाल पेड़ बन चुका है और इसके फल उसे खुद खाने पड़ रहे हैं!
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