चोर के हाथ में तिजोरी: आतंकवाद-रोधी समिति में पाकिस्तान को उपाध्यक्ष पद मिला, भारत के लिए चिंता का विषय
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की आतंकवाद-रोधी समिति में पाकिस्तान को उपाध्यक्ष के रूप में चुना जाना एक बड़ी विडंबना के रूप में देखा जा रहा है। ऐसे समय में जब पाकिस्तान पर आतंकवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगता रहा है, उसे आतंकवाद निरोधक कमेटी में महत्वपूर्ण भूमिका मिलना भारत और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए चुनौती बन गया है।
आतंकवाद निरोधक समिति में पाकिस्तान की भूमिका
इस समिति की अध्यक्षता इस बार अल्जीरिया को दी गई है, जबकि फ्रांस, पाकिस्तान और रूस उपाध्यक्ष के पद पर कार्य करेंगे। भारत के लिए यह स्थिति गंभीर इसलिए है क्योंकि भारत इन देशों के साथ अच्छे रणनीतिक संबंध रखता है, लेकिन पाकिस्तान के लिए यह जिम्मेदारी विवादित मानी जा रही है। कई विशेषज्ञ इसे ‘चोर के हाथ में तिजोरी’ कह कर संबोधित कर रहे हैं।
भारत का रुख और रणनीति
भारत फिलहाल UNSC का सदस्य नहीं है, इसलिए पाकिस्तान के प्रोपेगैंडा से मुकाबला करने के लिए नई दिल्ली से उम्मीद की जा रही है कि वह अपने प्रमुख रणनीतिक साझेदारों, विशेष रूप से P5 देशों (परमानेंट मेंबर – अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन, फ्रांस) और अन्य गैर-स्थायी सदस्यों जैसे डेनमार्क के साथ मिलकर कूटनीतिक स्तर पर सक्रिय होगा।
पाकिस्तान इस वर्ष UNSC के अस्थायी सदस्य के तौर पर 2025-26 के कार्यकाल में दो अहम कार्य समूहों की सह-अध्यक्षता भी करेगा, जो दस्तावेजीकरण, प्रक्रियात्मक मामलों और प्रतिबंधों से जुड़े मुद्दों पर काम करेंगे।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में नए अस्थायी सदस्य
UNSC में मंगलवार को हुए चुनावों में पांच नए गैर-स्थायी सदस्यों का चयन हुआ है, जिनका कार्यकाल 1 जनवरी 2026 से दो साल तक चलेगा। इनमें बहरीन, कांगो, लाइबेरिया, लातविया और कोलंबिया शामिल हैं।
यह स्थिति भारत के लिए राजनीतिक और कूटनीतिक चुनौती बनकर उभरी है, क्योंकि पाकिस्तान को आतंकवाद निरोधक समिति में उच्च पद मिलना अंतरराष्ट्रीय मंच पर सुरक्षा चिंताओं को और अधिक बढ़ावा देता है। भारत को अपने सहयोगी देशों के साथ मिलकर पाकिस्तान के प्रभाव को सीमित करने की रणनीति बनानी होगी।
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