April 29, 2026

तुर्की-पाकिस्तान को छोड़ा पीछे, मालदीव से बढ़ी नजदीकी; भारत की इकोनॉमी को मिलेगा सीधा फायदा

भारत और मालदीव के बीच व्यापारिक और रणनीतिक रिश्तों में एक नई मजबूती देखने को मिल रही है। ऐसे समय में जब तुर्की और पाकिस्तान के साथ रिश्ते तनावपूर्ण बने हुए हैं, भारत के समुद्री पड़ोसी मालदीव से सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था को प्रत्यक्ष लाभ मिलने की उम्मीद है।

मालदीव के विदेश मंत्री अब्दुल्ला खलील इन दिनों तीन दिवसीय भारत यात्रा पर हैं। इस दौरान दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग और समुद्री सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर समीक्षा बैठकें हो रही हैं। खासतौर पर समुद्री मार्ग से होने वाले व्यापार को लेकर अहम समझौते होने की संभावना है।

पिछले साल अक्टूबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने भारत-मालदीव विजन डॉक्यूमेंट को मंजूरी दी थी। अब उसी विजन डॉक्यूमेंट की समीक्षा और उसे आगे बढ़ाने की दिशा में यह दौरा अहम माना जा रहा है।

भारत के विदेश मंत्रालय ने इसे ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति का हिस्सा बताया है और कहा है कि मालदीव भारत का प्रमुख समुद्री पड़ोसी है। दोनों देशों की साझेदारी क्षेत्रीय सुरक्षा और विकास के व्यापक लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में मदद करेगी।

आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2023 में भारत ने मालदीव को लगभग 41.02 करोड़ डॉलर का निर्यात किया, जबकि 61.9 लाख डॉलर का आयात किया। भारत का करीब 50% विदेशी व्यापार और 80% ऊर्जा आयात समुद्री मार्गों से होता है, जिनमें मालदीव की स्थिति रणनीतिक रूप से बेहद अहम है। ऐसे में मालदीव के साथ मजबूत भागीदारी से भारत को समुद्री व्यापार में बड़ा फायदा मिल सकता है।

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