क्या 5 साल से कम उम्र के बच्चों को ORS देना सुरक्षित है? जानिए डॉक्टरों की सलाह
बरसात के मौसम में बच्चों को उल्टी या दस्त की समस्या आम हो जाती है। ऐसे में कई माता-पिता अपने छोटे बच्चों को ओआरएस देना शुरू कर देते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि पांच साल से कम उम्र के बच्चों को भी ओआरएस दिया जा सकता है, लेकिन इसकी सही मात्रा और समय को लेकर सतर्कता जरूरी है।
गाजियाबाद स्थित जिला एमएमजी अस्पताल के पीडियाट्रिक विशेषज्ञ डॉ. विपिनचंद्र उपाध्याय बताते हैं कि अगर बच्चे को उल्टी-दस्त है, तो ORS शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी को पूरा करने के लिए कारगर है। हालांकि अगर लक्षण दो दिन से ज्यादा बने रहें, तो खुद से ओआरएस देने के बजाय डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
अगर ओआरएस देने के कुछ घंटों के भीतर बच्चे की हालत बेहतर हो जाती है, तो उसे दिन में तीन से चार बार तक दिया जा सकता है। लेकिन लगातार उल्टी, सुस्ती, बेहोशी या पेशाब न आने जैसे लक्षणों की स्थिति में तत्काल डॉक्टर से संपर्क करें।
एम्स दिल्ली के पूर्व पीडियाट्रिशियन डॉ. राकेश कुमार बागड़ी के अनुसार, ओआरएस की मात्रा बच्चे की उम्र और वजन पर निर्भर करती है। औसतन:
6 महीने से 1 साल तक के बच्चे को हर दस्त के बाद 60-125 मिलीलीटर,
1 से 2 साल तक के बच्चों को 120-250 मिलीलीटर,
2 से 5 साल के बच्चों को 250-400 मिलीलीटर ओआरएस दिया जा सकता है।
अगर बाजार में मिलने वाला ओआरएस पैकेट उपलब्ध न हो, तो एक लीटर उबले ठंडे पानी में 6 चम्मच चीनी और आधा चम्मच नमक मिलाकर घर पर भी ओआरएस तैयार किया जा सकता है। इस घोल को छोटे-छोटे घूंटों में बच्चे को देना चाहिए। अगर बच्चा एक बार में न पी सके तो हर 5 से 10 मिनट में थोड़ी-थोड़ी मात्रा दी जा सकती है।
बच्चे को यदि बार-बार उल्टी हो रही हो, तो ओआरएस देने से पहले 10 से 15 मिनट का अंतर रखना चाहिए और फिर दोबारा कोशिश करनी चाहिए।
डॉक्टरों के मुताबिक, ओआरएस का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह शरीर में पानी और जरूरी लवण की कमी को तेजी से पूरा करता है और डिहाइड्रेशन से बचाता है। खास बात यह है कि यह न केवल बच्चों बल्कि हर उम्र के लोगों के लिए लाभकारी है, हालांकि बच्चों में यह सबसे अधिक कारगर माना जाता है।
ध्यान रखें कि ओआरएस घोल हमेशा ताजा बनाना चाहिए और 24 घंटे के अंदर ही उपयोग कर लेना चाहिए। पानी हमेशा उबला या फिल्टर किया हुआ होना चाहिए और पैकेट पर दिए गए निर्देशों का पालन करना जरूरी है।
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