April 20, 2026

2036 ओलंपिक की मेजबानी की दौड़ में भारत! लेकिन क्या 64,000 करोड़ रुपये का खर्च बनेगा रोड़ा?

भारत 2036 के ओलंपिक खेलों की मेजबानी की अपनी महत्वाकांक्षा को लेकर लगातार सक्रिय है। पिछले साल अक्तूबर में भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) ने अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) को एक आशय पत्र सौंपकर भारत की दावेदारी को आधिकारिक रूप दिया था। इसके बाद से ही देश में इस बहु-प्रतीक्षित आयोजन की संभावनाओं और उससे जुड़े खर्च को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

हाल ही में गांधीनगर में एक उच्च स्तरीय समन्वय समिति की समीक्षा बैठक हुई, जिसमें “अहमदाबाद 2036 के लिए तैयारी” शीर्षक वाला एक महत्वपूर्ण दस्तावेज प्रस्तुत किया गया। इस दस्तावेज में न केवल भारत के ओलंपिक मेजबानी के संकल्प को दोहराया गया, बल्कि इससे जुड़े संभावित खर्च का भी खुलासा किया गया।

भारत को कितनी लागत उठानी पड़ेगी?

टाइम्स ऑफ इंडिया (टीओआई) की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2036 ओलंपिक की मेजबानी के लिए भारत को 34,700 करोड़ रुपये से 64,000 करोड़ रुपये के बीच खर्च करना पड़ सकता है। यह आंकड़ा 2024 पेरिस ओलंपिक (32,765 करोड़ रुपये) से कहीं अधिक है।

रिपोर्ट के मुताबिक, खेलों का आयोजन मुख्य रूप से गुजरात के अहमदाबाद और गांधीनगर में केंद्रित होगा। इसके अलावा, भोपाल, गोवा, मुंबई और पुणे को भी सह-आयोजक शहरों के रूप में शामिल किया गया है। भारत इस महंगे आयोजन को सफल बनाने के लिए अपनी रणनीति पर तेजी से काम कर रहा है।

आईओसी की नई अध्यक्ष ने क्या कहा?

आईओसी की नव-नियुक्त अध्यक्ष किर्स्टी कोवेंट्री से लगातार भारत की दावेदारी को लेकर सवाल किए जा रहे हैं। हालांकि, अब तक उन्होंने कोई ठोस जवाब नहीं दिया है।

जब उनसे यह पूछा गया कि क्या 23 जून को मौजूदा अध्यक्ष थॉमस बाक के पद छोड़ने से पहले भारत की दावेदारी को त्वरित वार्ता में बदला जा सकता है, तो उन्होंने कहा,
“यह एक प्रक्रिया है और अभी जारी है। जहां तक मेरी जानकारी है, यह अगले कुछ महीनों तक जारी रहेगी। हमें भविष्य के मेजबान चयन में अपने सदस्यों को शामिल करने की आवश्यकता है, और मैं जल्द ही अपने विचार साझा करूंगी।”

कोवेंट्री 23 जून को ओलंपिक दिवस के मौके पर आईओसी अध्यक्ष का कार्यभार संभालेंगी। उनके नेतृत्व में ही 2036 के मेजबान के चयन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

2036 ओलंपिक की मेजबानी के लिए कौन-कौन हैं दावेदार?

भारत के अलावा कतर और सऊदी अरब समेत 10 से अधिक देशों ने 2036 ओलंपिक की मेजबानी में रुचि दिखाई है। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि कितने देशों ने आधिकारिक तौर पर अपनी दावेदारी पेश की है।

भारत ने आईओसी को आशय पत्र सौंपकर खुद को अनौपचारिक वार्ता से सतत वार्ता के चरण तक पहुंचा दिया है। यह ओलंपिक मेजबान बनने की प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।

मेजबान के चयन की प्रक्रिया क्या है?

मेजबानी के लिए चयन प्रक्रिया में आईओसी संभावित मेजबानों की परियोजनाओं और उनके इन्फ्रास्ट्रक्चर का मूल्यांकन करती है।

अगला चरण ‘लक्षित संवाद’ का होगा, जिसमें देशों को अपनी औपचारिक बोली पेश करनी होगी। इसके बाद आईओसी का एक विशेष आयोग उन प्रस्तावों का आकलन करेगा।

आईओसी अध्यक्ष बनने के बाद कोवेंट्री इस प्रक्रिया को गति देंगी, लेकिन 2036 के ओलंपिक की मेजबानी पर अंतिम निर्णय 2026 से पहले आने की संभावना नहीं है।

भारत के सामने चुनौतियां और उम्मीदें

1. भारी वित्तीय बोझ: 64,000 करोड़ रुपये का अनुमानित खर्च भारत के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है।

2. इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास: अंतरराष्ट्रीय स्तर के खेल गांव, स्टेडियम और परिवहन सुविधाओं का निर्माण करना होगा।

3. प्रतिद्वंद्वी देश: कतर, सऊदी अरब जैसे धनी देश भारत की राह में कड़ी प्रतिस्पर्धा पेश कर सकते हैं।

 

हालांकि, भारत के पास दुनिया को अपनी आर्थिक और खेल शक्ति दिखाने का एक सुनहरा अवसर भी है। अगर भारत इस प्रतिष्ठित आयोजन की मेजबानी हासिल करता है, तो यह देश की वैश्विक छवि को नया आयाम देगा।

अब सबकी नजरें आईओसी की अगली बैठक पर टिकी हैं, जहां 2036 ओलंपिक की मेजबानी की दौड़ में भारत की स्थिति और भविष्य की रणनीति पर स्पष्टता मिल सकती है।

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