खाद्य तेल की कीमतों पर सरकार की सख्ती, अब कंपनियों की हर गतिविधि पर होगी नजर
खाद्य तेल की लगातार बढ़ती कीमतों और जमाखोरी की शिकायतों के बीच सरकार ने सख्त रुख अपना लिया है। कीमतों को नियंत्रित करने और बाजार में उपलब्धता बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार ने ‘वेजिटेबल ऑयल प्रोडक्शन एंड अवेलेबिलिटी ऑर्डर 2025’ का ड्राफ्ट जारी किया है। इसके तहत खाद्य तेल उत्पादक कंपनियों को अब अपने उत्पादन, बिक्री और स्टॉक का पूरा डेटा नियमित रूप से सरकार को देना होगा।
सरकार ने 11 जुलाई तक सभी हितधारकों से इस प्रस्तावित आदेश पर सुझाव मांगे हैं। इस ड्राफ्ट का उद्देश्य बाजार में पारदर्शिता लाना और जमाखोरी पर प्रभावी रोक लगाना है। इसके तहत अगर कोई कंपनी निर्देशों का पालन नहीं करती है, तो सरकार उनके प्लांट का निरीक्षण कर सकती है और कार्रवाई भी की जा सकती है।
इसके अलावा सरकार अब मानक पैक साइज को फिर से अनिवार्य करने की योजना बना रही है। बीते वर्षों में 800 ग्राम, 850 ग्राम जैसे अनियमित पैक आम हो गए थे जिन्हें 1 किलो के रूप में बेचा जा रहा था। इससे उपभोक्ताओं में भ्रम की स्थिति बन रही थी और वे कीमतों को लेकर ठगे जा रहे थे। अब 500 ग्राम, 1 किलो, 2 किलो और 5 किलो जैसे तय मानकों को लागू किया जाएगा, जिससे हेरफेर पर रोक लगेगी।
इस कदम की जरूरत इसलिए पड़ी क्योंकि देश में खाद्य तेल की खपत तेजी से बढ़ रही है। 2020-21 में यह 24.6 मिलियन टन थी जो 2022-23 में बढ़कर 28.9 मिलियन टन हो गई। इसके साथ ही तेल की कीमतों में भी तेज उछाल आया है—सरसों, सोया, सूरजमुखी और पाम तेल के दाम 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ चुके हैं। सरकार को उम्मीद है कि इन नए नियमों से बाजार में स्थिरता आएगी और ग्राहकों का भरोसा फिर से कायम होगा।
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